मुझे भारत पर तरस आता है : अरुंधति रॉय
बुकर पुरस्कार से सम्मानित इस लेखिका ने हाल ही में कहा था कि जम्मू एवं कश्मीर कभी भी भारत का हिस्सा नहीं था। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली में हुर्रियत के कट्टरपंथी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी के साथ एक कार्यक्रम में कथित तौर पर कश्मीर की आजादी के पक्ष में भाषण दिया था। इसी के मद्देनजर उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इन दिनों श्रीनगर में मौजूद अरुंधति ने मंगलवार सुबह एक बयान जारी कर कहा, "मैं इस वक्त श्रीनगर में हूं। आज के अखबारों में लिखा गया है कि मैं गिरफ्तार हो सकती हूं। मैंने हाल ही में कश्मीर पर आयोजित एक सभा में जो कुछ कहा, उसके लिए मेरे ऊपर देशद्रोह का मामला दर्ज हो सकता है। मैंने वही बात ही थी जो यहां (कश्मीर) के लाखों लोग रोजाना करते हैं। मैंने इंसाफ की बात की थी।"
उन्होंने कहा, "मुझे उस राष्ट्र पर दया आती है जहां लेखकों को अपने विचार व्यक्त करने से रोका जाता है। इस बात के लिए भी दया आती है कि इंसाफ की बात करने वालों को जेल में भेजने की जरूरत पड़ती है। दूसरी ओर साम्प्रदायिक हिंसा करने वाले, नरसंहार करने वाले, कारपोरेट घोटालेबाज, लुटेरे, बलात्कारी और गरीबों पर जुल्म ढाहने वाले खुले घूम रहे हैं। मुझे इस पर दया आती है।"













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