गाय पालते हैं पर दूध नहीं पीते

बगमारा। त्रिपुरा के बगमारा गांव के लोग गाय को देवी मानते हैं। ये ग्रामीण वर्षो से चली आ रही परम्परा का निर्वहन करते हुए दूध का सेवन नहीं करते जबकि गांव के प्रत्येक घर में कम से कम एक गाय है।

बगमारा गांव के प्रधान रंजित त्रिपुरा ने बताया, "हम गायों को देवी की तरह मानते हैं, इसलिए हम गायों के दूध के इस्तेमाल की हर प्रक्रिया से दूर रहते हैं।" बगमारा गांव राजधानी अगरतला से 170 किलोमीटर दूर स्थित है।

उन्होंने कहा, "हम यह भी मानते हैं कि गाय के बछड़े को उसकी मां के दूध से दूर रखना एक पाप है और भगवान इस पाप के लिए माफ नहीं करेंगे।" दक्षिणी त्रिपुरा के रुपाइछारी ब्लॉक में बसे बगमारा जनजातीय गांव में 356 परिवार रहते हैं जिनमें करीब 2,000 आदमी, औरतें और बच्चे हैं।

यह गांव सालों से आतंकवाद से प्रभावित रहा है। त्रिपुरा सरकार ने दो पर्वतों के मध्य बसे इस गांव के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। राज्य सूचना विभाग के अधिकारी मनोरंजन दास कहते हैं, "इस सालों पुराने अवैज्ञानिक मिथक को तोड़ने के लिए राज्य प्रशासन ने जनजातीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए उन्हें पशुपालन के आधुनिक तरीकों में प्रशिक्षित करने की योजनाएं बनाई हैं।"

उन्होंने बताया, "दुग्ध उत्पादन और दूध देने वाली गायों की देखभाल के लिए पिछले सप्ताह एक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था और निकट भविष्य में इस तरह के और भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।" यहां के करीब 300 परिवार पारम्परिक झूम खेती (फसल उगाने का एक विशेष तरीका) पर निर्भर हैं और 342 परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं।

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