100 साल की उम्र में पीएचडी में दाखिला लिया
उनके परिजनों और दोस्तों ने शनिवार को उनका 100वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर आयोजित एक समारोह में दास ने बताया कि उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए दाखिला लिया है। दास ने कहा "ज्ञान प्राप्त करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती।"
दास के शोध का विषय उनके व्यक्तित्व की तरह ही आकर्षक है। दास नव वैष्णव आंदोलन के प्रसार में अपने गांव बोहोरी की भूमिका पर शोध करेंगे। उनका गांव पश्चिमी असम के बरपेटा जिले में पड़ता है। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले दास 19 वर्ष की उम्र में दो महीने जेल में बीता चुके हैं। वाणिज्य में स्नातक करने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की।
दास ने बताया, "मेरे जीवन का 100 वर्ष काफी संतोषप्रद रहा है। इस दौरान मैं अध्यापक और अधिवक्ता की रूप में अपनी सेवाएं देते हुए वर्ष 1971 में न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुआ।" उम्र के इस पड़ाव पर छड़ी का सहारा लिए दास को टेलीविजन पर क्रिकेट मैच देखना और पढ़ना पसंद है। दास का भरापूरा परिवार है। उनके परिवार में पांच पुत्र, एक पुत्री, 10 पोते और एक प्रपौत्र हैं।
राज्य के राज्यपाल और गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जे.बी. पटनायक ने कहा, "आज के समय में भोलाराम जैसे लोगों के बारे में सुनकर खुशी का अनुभव होता है। मुझे पूरा विश्वास है कि वह अगली पीढ़ी के लिए एक आदर्श पुरुष साबित होंगे।" इस बाबत गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति ओखिल कुमार मेधी का कहना है "विश्व में सौ वर्ष का छात्र मिलना मुश्किल है।"













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