मालेगांव विस्फोट : पुरोहित को नहीं मिली जमानत (लीड-1)

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मरक डेय काटजू और न्यायमूर्ति टी.एस.ठाकुर की पीठ ने कहा, "अपराध बहुत गंभीर है। इस घटना में कई जानें चली गईं थीं और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे।"

अदालत ने हालांकि पुरोहित की ओर से दायर याचिका स्वीकार कर ली और उसे अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दे दिया।

महाराष्ट्र के मालेगांव में विस्फोट के सिलसिले में अपनी गिरफ्तारी के समय पुरोहित भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल थे।

ज्ञात हो कि वर्ष 2008 में हुए बम विस्फोटों से मालेगांव कस्बा दहल उठा था। उस घटना में कम से कम सात लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हो गए थे।

पुरोहित के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को महाराष्ट्र संगठित अपराध अधिनियम (मकोका) के तहत निरुद्ध किया गया है, लेकिन यह अधिनियम उसके खिलाफ नहीं लगाया जा सकता।

वकील ने कहा कि यहां तक कि मकोका अदालत ने भी कहा है कि पुरोहित को इस कानून के तहत निरुद्ध नहीं किया जा सकता और वह जमानत के हकदार हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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