सरिस्का में फिर जुटने लगी पर्यटकों की भीड़

अलवर जिले के सरिस्का बाघ अभ्यारण्य को एक अक्टूबर से लोगों के लिए खोल दिया गया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अभ्यारण्य में प्रवेश के लिए बिके पहले दो दिन के टिकटों से ही 300,000 रुपये से ज्यादा की कमाई हुई।

यह अभ्यारण्य जयपुर से 110 किलोमीटर दूर स्थित है। हर साल 30 जून को बारिश के मौसम के चलते इसे जनता के लिए बंद कर दिया जाता है। एक अक्टूबर को एक बार फिर यह लोगों के लिए शुरू हो गया है।

अभ्यारण्य में भारतीयों के लिए प्रति व्यक्ति प्रवेश शुल्क 60 रुपये है जबकि विदेशियों के लिए यह शुल्क 450 रुपये है। शनिवार के दिन अभ्यारण्य में करीब 7,000 लोग पहुंचे, इस दिन अलवर के लोगों के लिए प्रवेश निशुल्क था।

वन अधिकारियों ने बताया कि रविवार को अभ्यारण्य में 1,200 पर्यटक पहुंचे।

एक वरिष्ठ वन अधिकारी का कहना है, "हम बहुत खुश हैं कि सरिस्का ने एक बार फिर पर्यटकों को आकर्षित करना शुरू कर दिया है।"

मार्च 2005 में 'वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया' ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की थी कि सरिस्का बाघ अभ्यारण्य में एक भी बाघ नहीं बचा है। रिपोर्ट में शिकार को इसका मुख्य कारण बताया गया था।

भारी आलोचनाओं के बाद राजस्थान सरकार ने सवाई माधौपुर जिले में स्थित रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान से सरिस्का में बाघ लाए जाने का निर्णय लिया था। वर्ष 2008 से लेकर अब तक दो नर और तीन मादा बाघ सरिस्का लाए जा चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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