विश्वास की गंगा, सफलता की नींव
सरश्री तेजपारखी
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। आत्मविश्वास, विश्वास और तेज विश्वास क्या है? इन्हें जानने से पहले मन के बारे में कुछ आम बातें और एक खास बात जानना आवश्यक है। आम बात यह है कि हर 'हर इंसान के अंदर मन है और हर अविश्वासी (गुलाम) इस मन से परेशान है तथा हर विश्वासी (विश्व वासी) इस मन का मालिक है।'
मन कैसा है? मन एक आम जैसा है। जिस तरह कुछ आमों में कुछ हिस्सा सड़ा हुआ होता है, उसी तरह मन का भी कुछ हिस्सा सड़ा हुआ होता है, जिसे 'तोलू मन' (कान्ट्रास्ट मन) कहा जाता है। यही तोलू मन इंसान के अंदर परेशानी का कारण है।
आम बात यह है कि जब आम पक जाता है तब वह पेड़ से गिर जाता है, लेकिन यह मन कभी पकता (गिरता) नहीं। इस बिना पके मन को गिराने के लिए बहुत सारी विधियां बनाई गई हैं, जैसे जप-तप, तंत्र-मंत्र, कर्म-धर्म, भक्ति, ज्ञान-ध्यान इत्यादि। इन सब विधियों का प्रचलन इसी तोलू मन को गिराने के लिए किया गया है। ये विधियां मन में तेज विश्वास, तेज प्रेम तेज स्वीकार भाव जगाने के लिए बनाई गई हैं, लेकिन आज उन विधियों का उपयोग सिर्फ कर्मकाण्ड के रूप में किया जा रहा है।
आम का कुछ भाग सड़ जाए तो लोग उसे काटकर फेंक देते हैं, लेकिन मन एक ऐसे किस्म का आम है, जिसके सड़े हिस्से 'तोलू मन' को हम काटकर फेंक नहीं सकते, उसके साथ कुछ और ही करना पड़ता है। इस मन में आत्मविश्वास की दवा डालकर इसे स्वस्थ करना पड़ता है।
यह सभी जानते हैं कि किसी नकारात्मक घटना के बाद मन में विचार आने शुरू हो जाते हैं तो रुकने का नाम ही नहीं लेते हैं। जब तक हमें विचारों को रोकने का प्रशिक्षण नहीं मिलता, जब तक समझ, श्रवण, भक्ति की प्यास नहीं जगती, जब तक हमें यह पता नहीं चलता कि हर कर्म सेवा है, तब तक विचार रुकते ही नहीं हैं और यह मन हमें बहुत परेशान करता रहता है।
जब तक मन में विश्वास नहीं जगता, तब तक हमें कामयाबी नहीं मिलती। विश्वास की शक्ति पाकर मन कर्मवीर बन जाता है। मन विश्वास में नहाकर दोष मुक्त हो जाता है। विश्वास मन के लिए गंगा नदी का काम करता है, जिसमें सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। पवित्र मन, प्रेम और विश्वास से इंसान संपूर्ण जग जीत सकता है। पैसे और ताकत से जग नहीं जीता जा सकता। पैसे और ताकत से सिंकदर भी जग जीतने का सपना ही देखता रह गया।
विश्वास का विकास समय, ज्ञान और प्रयोगों द्वारा होता है। जिस बात पर आप विश्वास नहीं रखते थे, उसी बात पर कुछ समय और समझ मिलने के बाद आप यकीन करने लगते हैं। विश्वास का विकास उच्चतम अवस्था तक होना चाहिए तब ही हम विश्वास की चमत्कारिक ताकत जान पाएंगे।
आत्मविश्वास रखनेवाले इंसान जल्दी विकास करते हैं। विकास के साथ विश्वास का भी विकास होता है और इस तरह विश्वास बढ़ने से आपका विकास और ज्यादा बढ़ जाता है। विश्वास से विकास और विकास से विश्वास का विकास बढ़ता है।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि. द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'आत्मविश्वास सफलता का द्वार' से साभार।)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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