मप्र में धन की नहीं, योजना की कमी : सर्वेक्षण
प्रदेश के योजना आयोग ने आम आदमी की जरूरत को जानने के लिए पांच जिलों- खरगोन, मंडला, छतरपुर, राजगढ़ और सतना में एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान का मकसद इन इलाकों के लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, अधोसंरचना और नल-जल (पेयजल) जैसी योजनाओं की जरूरत को जानना था। इसके लिए ग्राम स्तर पर बैठकें हुईं, जिनमें जरूरत संबंधी आए सुझावों को जिला स्तर पर संकलित किया गया।
सूत्रों के मुताबिक ग्राम स्तर पर हुई बैठकों में लोगों ने अपनी समस्याओं को खुलकर जाहिर किया। जिन पांच जिलों में यह सर्वेक्षण किया गया है, उससे इस बात का खुलासा होता है कि संबंधित जिलों की समस्याओं का निराकरण 429 करोड़ रुपये से संभव है, वहीं सरकार की ओर से हर वर्ष एक जिले पर 450 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। औसत तौर पर ग्राम स्तर की समस्याओं को 40 लाख में कम किया जा सकता है, जबकि उन पर 45 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार ने जरूरत से ज्यादा राशि मंजूर की है, इसके बावजूद समस्याएं बरकरार हैं।
राज्य योजना आयोग के सर्वेक्षण ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाएं संबंधित जिले और गांव को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की जाती हैं। सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि किसी क्षेत्र या गांव को जरूरत पेयजल योजना की है, मगर वहां स्कूल भवन पर राशि खर्च की जा रही है।
सरकारी सर्वेक्षण से एक बात यह भी खुलकर सामने आई है कि जिन लोगों के हाथ में राशि को खर्च करने की जिम्मेदारी है, वे जनता के बजाय अपने हितों का ज्यादा ध्यान रखते हैं। यही कारण है कि गांव स्तर की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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