सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन की याचिका खारिज की
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने ब्रिटिश टेलीकॉम कम्पनी वोडाफोन को 2.6 अरब डॉलर के कर विवाद में राहत देने से इंकार करते हुए बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली उसकी याचिका खारिज कर दी है।
वोडाफोन ने हचिसन वम्पोआ की 67 फीसदी हिस्सेदारी का 11 अरब डॉलर में अधिग्रहण किया था जिस कारण प्रशासन ने उस पर 2.6 अरब डॉलर 'कैपिटल गेन टैक्स' लगाया था। बम्बई उच्च न्यायालय ने वोडाफोन को कर का भुगतान करने का आदेश दिया है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है।
यह फैसला प्रधान न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने आय कर विभाग से चार सप्ताह के भीतर देनदारियां तय करने और कंपनी पर कोई अन्य शुल्क नहीं लगाने को कहा। साथ ही वोडाफोन को राहत दी कि आय कर विभाग के मूल्यांकन से असंतुष्ट होने पर वह शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। मामले में अगली सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का दूरगामी परिणाम उन विदेशी कम्पनियों पर भी पड़ेगा जिन्होंने भारत में अधिग्रहण सौदे किए हैं।
दरअसल, देश में अधिग्रहण करने वाली कई अन्य विदेशी कम्पनियां भी इसी तरह की कर छूट की मांग कर रही हैं। इनमें पेय पदार्थ बनाने वाली कम्पनी एसएबी मिल्लर, जीई और एटी एंड टी शामिल हैं। इन कम्पनियों ने पिछले कुछ वर्षो में भारत में अधिग्रहण सौदे किए हैं।
आय कर विभाग की दलील है कि जिस कम्पनी का अधिग्रहण किया गया उसकी संपत्ति भारत में थी जिस कारण वोडाफोन को 'कैपिटल गेन टैक्स' देना पड़ेगा। पिछले माह मामले की सुनवाई करते हुए बम्बई उच्च न्यायालय ने कहा था कि कर विभाग के आदेश को उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर करके नहीं देखा जा सकता। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष एसएसएन मूर्थी ने पिछले सप्ताह कहा था कि वोडाफोन जैसे हुए सौदों की सरकार जांच कर रही है और कई सौदों का चुनाव किया गया है। सरकार अपने वैधानिक राजस्व को नहीं छोड़ सकती।












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