घाटी में स्कूल खुले, अमन कायम होने की उम्मीद
यहां के एक प्रतिष्ठित स्कूल के छात्र मुदस्सिर (बदला हुआ नाम) ने कहा, "मैं दो महीनों बाद स्कूल आया हूं। यह खुशी की बात है जिसे में शब्दों में बयां नहीं कर सकता। अगर हालात पूरी तरह से नहीं सुधारे तो मेरे मां-बाप शायद ही मुझे स्कूल भेजें।"
श्रीनगर के पुराना शहर इलाके के ज्यादातर स्कूलों में छात्रों की हाजिरी न के बराबर थी हालांकि शिक्षक और अन्य कर्मचारी स्कूल पहुंचे। स्कूलों को खोलने के लिए राज्य सरकार ने सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "बच्चों को ले जा रही बसों को शहर में बिना रोक-टोक के जाने देने की इजाजत दी गई है। अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाले लोगों को पूरी आजादी के साथ आने-जाने की स्वीकृति दी गई है। स्कूलों में कर्मचारियों की उपस्थिति 100 फीसदी रही जबकि छात्रों का रुझान भी अच्छा रहा है।"
अभिभावकों का हालांकि कुछ और कहना है। एक अभिभावक ने कहा, "इस शहर में कर्फ्यू लगाया गया है और बंद का आह्वान किया गया है। ऐसे में बच्चों के स्कूल की ओर लौटने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? "
केंद्र सरकार की ओर से आठ सूत्रीय प्रस्ताव के ऐलान के बाद पहली बार घाटी में स्कूल खुले हैं। केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने शनिवार को घाटी के लिए आठ सूत्रीय प्रस्ताव का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि पथराव करने वाले युवकों को रिहा करने के साथ ही 11 जून के बाद की हिंसा में मारे लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये दिए जाएंगे। घाटी में सुरक्षा बलों के साथ झड़प में लगभग 108 लोग मारे गए हैं।
केंद्र ने जम्मू एवं कश्मीर की सरकार से यह भी कहा है कि वह एकीकृत कमान की बैठक बुलाए। इस बैठक में घाटी में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और सशत्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) के भविष्य पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से भी एकीकृत कमान की बैठक बुलाने का फैसला भी किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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