माओवादियों और पुलिस के बीच मुठभेड़, 1 जवान की मौत

बीबीसी से हुई बातचीत में पुलिस प्रमुख पराजित मुखर्जी ने बताया, ''हमारे पास पुख़्ता जानकारी थी कि माओवादी एक अस्थायी कैंप लगा रहे हैं. हम तक पहुँची रिपोर्ट के मुताबिक इस कैंप का इस्तेमाल हमले करने के लिए किया जाना था. इसलिए हमने तय योजना के तहत कैंप पर हमला किया.''
पुलिस ने कैंप पर शनिवार तड़के हमला किया. ये हमला रायफ़ल और लाइट मशीन गनों से किया गया. माओवादियों ने भी जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ क़रीब पाँच घंटों तक चली. मुठभेड़ के बाद माओवादी विद्रोही अपने एक मृत साथी को छोड़कर जंगलों की ओर भाग गए.
इस संघर्ष में सुरक्षाबलों की अगुवाई कर रहे सीआरपीएफ़ के डी स्टीफ़ेन की मौत हो गई. डी स्टीफ़ेन मणिपुर के हैं और उनके शव को उनके घर भेजा जा रहा है, जहाँ पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
पश्चिम बंगाल के पुलिस प्रमुख ने बताया कि माओवादियों को हटाने के लिए इस क्षेत्र में और सुरक्षाबल तैनात किए जाएँगे. मुखर्जी ने कहा, ''ये अभियान इसलिए जारी है क्योंकि अगर हम माओवादियों के पीछे नहीं गए तो वो हमारे पीछे आ जाएँगे."
पिछले दो सालों में लालगढ़ इलाक़े में माओवादियों ने अपना दबदबा क़ायम कर लिया है. तबसे अब तक माओवादी हिंसा में आदिवासी बहुल पुरुलिया, बाँकुरा और पश्चिमी मिदनापुर के सैकड़ो लोग मारे गए हैं. इनमें से ज़्यादातर सुरक्षाबल या राज्य के सत्तासीन राजनीतिक दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक हैं.












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