कश्मीर : एएफएसपीए पर एकीकृत कमान करेगा फैसला (राउंडअप)
हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा और राज्य सरकार से कहा गया है कि वह घाटी में सुरक्षा बलों की तैनाती और सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) के भविष्य पर फैसला लेने के लिए एकीकृत कमान की बैठक बुलाए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने ये घोषणाएं की। बैठक में चिदम्बरम, रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी और केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने हिस्सा लिया।
सीसीएस का यह निर्णय 39 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के आकलन पर आधारित है, जिसने हाल ही में जम्मू एवं कश्मीर का दौरा किया था।
चिदम्बरम ने कहा, "एक प्रमुख व्यक्ति वार्ताकारों के समूह का नेतृत्व करेगा। यह समूह जम्मू एवं कश्मीर के सभी वर्ग के लोगों के साथ एक टिकाऊ संवाद प्रक्रिया शुरू करेगा। समूह जिन लोगों से बातचीत करेगा, उनमें राजनीतिक पार्टियां और संगठन, युवक एवं विद्यार्थी संगठन, सामाजिक संगठन और अन्य घटक शामिल होंगे।"
हिंसा समाप्त करने और पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए चिदम्बरम ने कई अन्य उपायों की घोषणा की।
चिदम्बरम ने कहा, "केंद्र राज्य सरकार को सुझाव देगी कि पथराव के लिए या इस तरह के किसी अन्य मामलों में गिरफ्तार किए गए सभी विद्यार्थियों एवं युवकों को तत्काल रिहा कर दिया जाए और उनके खिलाफ आरोप वापस ले लिया जाए।"
चिदम्बरम ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत सभी मामलों की तत्काल समीक्षा की जाएगी अज्ञैर उचित मामलों में गिरफ्तारी आदेश वापस लिए जाएंगे।
चिदम्बरम ने कहा कि राज्य सरकार से कहा गया है कि वह एकीकृत कमान की तत्काल बैठक बुलाए और कश्मीर घाटी में, खासतौर से श्रीनगर में सुरक्षा बलों की तैनाती की समीक्षा करे। एकीकृत कमान में सेना, सुरक्षा बल और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा मुख्यमंत्री व राज्य के गृह मंत्री शामिल हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एकीकृत कमान को इस बात पर निर्णय लेना है कि क्या कुछ इलाकों से एएफएसपीए को हटा लिया जाए या नहीं।
इसके अलावा सीसीएस की बैठक में राज्य में स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के नवीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये दिए जाने तथा अधोसंरचना संबंधी परियोजनाओं के अध्ययन के लिए एक कार्य बल की नियुक्ति किए जाने का भी निर्णय लिया गया।
चिदम्बरम ने कहा कि सभी घोषणाएं कुछ दिनों में लागू कर दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन कदमों में जम्मू एवं कश्मीर की जनता के साथ-साथ अलगाववादियों की चिंताओं को भी शामिल किया गया है।
उधर श्रीनगर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सीसीएस द्वारा लिए गए निर्णयों का स्वागत किया और कहा कि अगले सप्ताह एकीकृत कमान की बैठक होगी।
अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं को बताया, "राज्य सरकार कोई एकतरफा फैसला नहीं लेगी। सेना भी अकेले एएफएसपीए पर कोई फैसला नहीं ले सकती।" अब्दुल्ला ने कहा, "मैं कोई गैरजिम्मेदार मुख्यमंत्री नहीं हूं, जो कि एकतरफा फैसला लूं।"
अब्दुल्ला ने कहा कि घाटी से सशस्त्र सेना और सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति घटानी है। उन्होंने कहा कि स्कूल कॉलेज सोमवार से खुल जाएंगे। उन्होंने कहा कि वार्ताकारों के बारे में केंद्र सरकार ने कुछ प्रारंभिक विचारों का आदान-प्रदान किया है।
सीसीएस का यह निर्णय 39 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के आकलन पर आधारित है, जिसने हाल ही में जम्मू एवं कश्मीर का दौरा किया था।
ज्ञात हो कि कश्मीर घाटी में 11 जून से शुरू हुए हिंसा के दुष्चक्र के बाद एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू एवं कश्मीर का दौरा किया। पिछले तीन महीनों के दौरान सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने वाली भीड़ पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 108 लोग मारे जा चुके हैं। मृतकों में अधिकांश युवक और किशोर शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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