पूर्वोत्तर के पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण जरूरी : पाटील
अगरतला, 25 सितम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने यहां शनिवार को लोगों से अपील की कि वे पूर्वोत्तर भारत के पारंपरिक ज्ञान को लिपिबद्ध करें, सुरक्षित रखें तथा उसे और समृद्ध बनाएं।
त्रिपुरा विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में पाटील ने कहा, "पूर्वोत्तर के राज्य पारंपरिक ज्ञान के खजाने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे ज्ञान की पहचान कर उन्हें लिपिबद्ध करने, उसमें सुधार करने एवं उनके संरक्षण के उपाय किए जाने चाहिए।"
पूर्वोत्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प की विधियों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, "विश्वविद्यालय एवं क्षेत्र के अन्य सम्बंधित संस्थान निर्माण पद्धतियों, आकार-प्रकार तथा उत्पादों का विकास कर शिल्पियों की मदद कर सकते हैं।"
राष्ट्रपति दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि थीं। समारोह में त्रिपुरा के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
पाटील ने कहा, "भारत सरकार ने राष्ट्रीय कुशलता विकास मिशन (एनएसडीएम) की शुरुआत की है। इससे वर्ष 2022 तक 50 करोड़ कुशल व्यक्ति तैयार हो सकेंगे।"
उन्होंने कहा, "इस मिशन से प्रशिक्षण, मानक स्थापित करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने एवं प्रौद्योगिकी मंच के विकास में मदद मिलेगी।"
त्रिपुरा विश्वविद्यालय के कुलपति अरुणोदय साहा ने कहा, "हम निकट भविष्य में विशेष दीक्षांत समारोह का आयोजन कर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को डी.लिट् की उपाधि से सम्मानित करेंगे।"
उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा विश्वविद्यालय की स्थापना 1987 में हुई थी और जुलाई, 2007 में इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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