उत्तर भारत में बाढ़ के हालात में सुधार (राउंडअप)
इस बीच, उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तराखण्ड में बाढ़ की चपेट में आए लाखों लोगों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ)राहत सामग्री भेज रहा है। यूनिसेफ द्वारा भेजी जा रही राहत सामग्री में तिरपाल, चादरें, जल शुद्धिकरण के लिए गोलियां, मच्छरदानियां एवं अन्य वस्तुएं शामिल हैं।
यूनिसेफ की तरफ से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में लगभग 17 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य सरकार ने बाढ़ राहत सामग्री के वितरण के लिए 276 राहत शिविर स्थापित किए हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश और उत्तराखण्ड के कालागढ़, नंद सागर, भमगोड़ा बांध से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से उफनाई गंगा, रामगंगा, कोसी और मालन नदियों के जलस्तर में भी अब कमी दर्ज की जा रही है। उधर, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 12 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। राज्य के राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के. के. सिन्हा ने कहा कि प्रदेश में अब तक बाढ़ से 86 मौतें हुई हैं।
बिहार में सबसे खराब स्थिति गंडक नदी के तटबंध के मुहाने पर बसे सेमरिया गांव की है, जहां कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गांव के करीब तीन दर्जन मकान गंडक नदी के जल प्रवाह में बह गए हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 पर अब आवागमन पूरी तरह से सामान्य हो गया है। बाढ़ से करीब 500 गांवों की पांच लाख से अधिक आबादी प्रभावित हुई है।
बिजनौर से अपर जिलाधिकारी (वित्त) रेवा राम सिंह ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से उत्तराखण्ड के बांधों से बड़ी मात्रा में पानी नहीं छोड़ा गया है। इससे गंगा, रामगंगा जैसी नदियों के जलस्तर में कमी आने से हालात में सुधार हो रहा है। प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत कार्य जारी है।
मुरादाबाद में हालात में पहले से थोड़ा सुधार आया है। जिन रिहायशी इलाकों में तीन से चार फुट तक पानी भर गया था, वहां कोसी के जलस्तर में गिरावट आने से पानी का स्तर अब कम हो रहा है।
दिल्ली में यमुना नदी में शनिवार को जलस्तर कम होना शुरू हो गया। इससे राजधानी में बाढ़ का खतरा कम हो गया है। बाढ़ के चलते निचले इलाकों के कई घर पानी में डूबे हुए हैं।
बाढ़ विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "यमुना में दिन में जलस्तर में और कमी आने की संभावना है।" जलस्तर में कमी आने की वजह से दिल्ली के निचले इलाके और यमुना के किनारे रहने वाले लोगों को थोड़ी राहत मिलेगी। इन इलाकों में सीवर और यमुना का पानी घुस गया है।
यमुना में जलस्तर खतरे के निशान 204.83 मीटर से ऊपर है हालांकि अब इसमें कमी आनी शुरू हो गई है। शनिवार सुबह जलस्तर 206.10 मीटर के स्तर पर पहुंच गया था।
वहीं उत्तर प्रदेश के आगरा और मथुरा जिले में यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है और खेतों में पानी भर गया है। नदी का पानी आगरा फोर्ट के चारों तरफ बनी खाई और आगरा-दिल्ली राजमार्ग स्थित कैलाश मंदिर में प्रवेश कर गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि वृंदावन और मथुरा जिले में कम से कम एक दर्जन बस्तियों में बाढ़ आ गई है और लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। मथुरा में नदी अपने खतरे के निशान 165.2 मीटर से 1.71 मीटर ऊपर बह रही है।
नदी के पानी से मथुरा स्थित बीयर रेस्क्यू सेंटर की दूसरी इकाई भी प्रभावित हुई है। भालुओं को दूसरे ऊंचे स्थानों पर ले जाया गया है।
अधिकारी के अनुसार खेरागढ़ उप जिले में सारेंधी बांध से अधिक मात्रा में छोड़े गए पानी से कृषि भूमि के बड़े क्षेत्र में बाढ़ आ गई है। ताजमहल के समीप स्थित मनटोला नुल्लाह से आने वाला पानी शुक्रवार रात आगरा फोर्ट के चारों तरफ बने खाई में प्रवेश कर गया।
इसके अलावा नदी का पानी आगरा-दिल्ली राजमार्ग स्थित कैलाश मंदिर में भी प्रवेश कर गया है। जिला मजिस्ट्रेट अमृत अभिजात ने पत्रकारों को बताया कि जरूरत पड़ने पर सेना बुलाई जाएगी।
दूसरी ओर हथिनीकुंड बांध से युमना में पानी छोड़े जाने पर हरियाणा में बाढ़ के हालात में सुधार हो रहा है। शनिवार को बांध से 54,452 क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया।
हथिनीकुंड बांध नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "यमुना में पानी छोड़े जाने से बाढ़ के पानी में महत्वपूर्ण कमी हुई है। शुक्रवार को यमुना में 80,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।"
उन्होंने बताया कि छोड़े गए पानी का वेग काफी तीव्र है, लेकिन इससे बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। साथ ही हिमाचल प्रदेश और ऊपरी शिवालिक पहाड़ियों में कम बारिश होने से प्रवाह में कमी आई है। गुरुवार को यमुना में 3,00,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
अधिकारी ने बताया कि पिछले 32 साल के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए सोमवार को हथिनीकुंड बांध से 744,507 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया। इससे पहले यमुना में तीन सितंबर 1978 को 709,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
अधिकारी के मुताबिक हरियाणा के सभी प्रभावित जिलों में बाढ़ के पानी में कमी आने लगी है। शुक्रवार से किसी नए इलाके में बाढ़ की सूचना नहीं है।
शनिवार को एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया, "बाढ़ की स्थिति अब नियंत्रण में है और बाढ़ प्रभावित सभी क्षेत्रों में बचाव कार्य किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल में सभी एहतियाती कदम उठाया है।"
इंडो-एशिया न्यूज सर्विस।
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