पत्रकार कन्हैयालाल नंदन नहीं रहे (लीड-1)
नंदन ने शनिवार तड़के अंतिम सांस ली। उनकी तबीयत पिछले दिनों अचानक बिगड़ गई थी जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार शनिवार तड़के तीन बजे के आसपास उन्होंने अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से डायलिसिस पर थे।
उनका जन्म एक जुलाई, 1933 में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के परसदेपुर गांव में हुआ था। उनके परिवार में पत्नी और दो पुत्रियां हैं। उनकी एक पुत्री अमेरिका और दूसरी दिल्ली में ही रहती हैं। उनका रविवार को लोदी कॉलोनी के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनके एक करीबी सहयोगी के अनुसार नंदन स्वभाव से बेहद सरल और उच्च व्यक्तित्व के धनी थे। वह बतौर संपादक खोजी पत्रकारिता और नए प्रयोगों के पक्षधर थे। उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत मशहूर पत्रिका 'धर्मयुग' से की। पत्रकारिता में कदम रखने से पहले अध्यापन से जुड़े थे।
नंदन ने पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाया। पराग, सारिका और दिनमान जैसी पत्रिकाओं में बतौर संपादक अपनी छाप छोड़ने वाले नंदन ने कई किताबें भी लिखीं। उन्हें पद्मश्री के अलावा भारतेन्दु पुरस्कार, अ™ोय पुरस्कार और नेहरू फेलोशिप से भी नवाजा गया।
उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शनिवार को एआईएनसीईसी के अध्यक्ष विश्व बंधु गुप्ता कहा कि उनका दुनिया से जाना हिंदी साहित्य और संस्कृति के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि कन्हैया लाल नंदन एक ऐसे पत्रकार, कवि और लेखक थे जिन्होंने शताब्दियों की कृत्रिम बाधाओं से अप्रभावित रहते हुए लैंगिक समानता और सार्वभौमिक प्रेम का संदेश दिया। उनकी कृतियों में मानव प्रेम की गाथाएं बहुत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत की गई हैं।
गुप्ता ने कहा कि नंदन ने विभिन्न पदों पर रहते हुए हिंदी पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने हिंदी पत्रिका धर्मयुग के संपादक, नवभारत टाइम्स के फीचर संपादक तथा पराग, सारिका, दिनमान और हिंदी दैनिक संडे मेल के संपादक के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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