ज्ञानपीठ विजेता कुरुप का शानदार स्वागत
राज्य के संस्कृति मंत्री एम.ए. बेबी और लोक कल्याण विभाग के मंत्री एम. विजयकुमार ने ओ.एन.वी. नाम से मशहूर कवि कुरुप की अगवानी की।
कुरुप दुबई के मलयाली समुदाय द्वारा आयोजित एक समारोह में हिस्सा लेने वहां गए थे। साहित्य के क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले कुरुप पांचवें मलयाली साहित्यकार हैं।
कुरुप के सैकड़ों शुभचिंतकों ने उन्हें शॉल और फूल देकर सम्मानित किया। अपने सम्मान से भावुक नजर आ रहे 79 वर्षीय कुरुप ने कहा, "आप लोगों ने जो प्रेम और सम्मान दिया है, उससे मैं अविभूत हूं। मैं आप से सिर्फ यही वादा कर सकता हूं कि यदि मेरे हाथों में आगे शक्ति रही तो मैं अपनी एक रचना के जरिए आप तक इस प्रेम को लौटाऊंगा।"
कुरुप से पहले केरल के चार अन्य साहित्यकारों को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिल चुका है। इनमें के जी. संकर कुरुप (1965), एस.के पोट्टेकड़ (1980), थकाझी सिवा संकर पिल्लई (1984) और एम.टी. वासुदेवन नायर (1995) को ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया।
कविता के क्षेत्र में ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले कुरुप केरल के दूसरे कवि हैं। यही नहीं कुरुप को फिल्म 'वैशाली' के लिए 1989 में सर्वश्रेष्ठ गीतकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है।
केरल के कोल्लम के छावरा में 27 मई 1931 को जन्मे कुरुप ने अपना स्नातक अर्थशास्त्र में और स्नातकोत्तर मलयालम साहित्य में किया। इनकी पहली कविता 'मुनोत्तु' (आगे) नाम से वर्ष 1946 में छपी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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