सर्वधर्म सौहार्द का प्रतीक है 'सत्यार मंदिर'
अयोध्या, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। अयोध्या में एक मंदिर वर्षो से सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देता आ रहा है। इस अनूठे मंदिर में आपको एक ही छत के नीचे देवी-देवताओं के साथ-साथ सभी धर्मो के ईश्वर के दर्शन एक साथ हो जाएंगे।
अयोध्या में हनुमान गढ़ी के निकट सत्यार मंदिर में एक ही जगह पर आपको भगवान राम, गौतम बुद्ध, भगवान महावीर और प्रभु ईसामसीह की मूर्तियां और मक्का-मदीना व जरथुस्त्र के फोटो देखने को मिलेंगे।
मंदिर के पुजारी हनुमान प्रसाद (45) ने आईएएनएस से कहा कि जो लोग पहली बार इस अनूठे मंदिर में आते हैं उन्हें हर धर्मो के ईश्वर की मूर्तियां और चित्रों को एक साथ देखकर बहुत आश्चर्य होता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक गुजराती व्यवसाई व सामाजिक कार्यकर्ता लालजीभाई सत्य सनेही ने करीब 60 साल पहले विभिन्न धर्मो के लोगों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द्र को बढ़ावा देने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था। पुजारी ने बताया कि हर धर्म के अराध्यों की मूर्तियों और चित्रों को एक छत के नीचे लाने के पीछे उनका मकसद यही था कि वह लोगों को बताना चाहते थे कि सभी धर्मों के आराध्यों का रूप एक ही है।
मंदिर का नाम दो क्षअरों को मिलाकर रखा गया। सत्य और यार..मतलब सच्ची दोस्ती। स्थानीय निवासी गोकुल पांडे कहते हैं कि सही मायने में यह मंदिर आपसी दोस्ती का पैगाम देता है। गुलाबी पत्थरों से निर्मित सत्यार मंदिर में प्रतिदिन हर धर्म के श्रद्धालु आकर अपने ईश्वर के साथ-साथ दूसरे धर्मो के ईश्वर के सामने भी शीश झुकाते हैं। त्योहारों के दिन आयोजित कार्यक्रम में जरूरतमंदों के बीच भोजन और कपड़ों का वितरण किया जाता है।
मंदिर प्रशासन के पदाधिकारी शीतला सिंह कहते हैं कि अयोध्या के स्थानीय वदूर से आने वाले श्रद्धालु मंदिर के रखरखाव के लिए चंदा के रूप में अपना योगदान करते हैं। चंदे की रकम से हम लोग दीपावली, ईद, क्रिसमस सहित विभिन्न धर्मो के सभी प्रमुख त्योहारों पर कार्यक्रम आयोजित करते हैं और गरीब लोगों के लिए लंगर की व्यवस्था की जाती है और उनके बीच कपड़े बांटे जाते हैं।
सिंह कहते हैं कि मंदिर निर्माण से लेकर अब तक 60 साल के दौरान किसी ने इस मंदिर का विरोध नहीं किया। सभी इसे सांप्रदायिक सौहाद्र की एक अनूठी मिसाल मानते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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