गया में पिंडदान के लिए जुटने लगी भीड़
हर साल लाखों लोग पितृपक्ष के मौके पर अपने पूर्वजों के पिंडदान के लिए गया आते हैं।
गया के जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह का कहना है कि इस वर्ष पितृपक्ष में आठ लाख से ज्यादा लोगों के गया पहुंचने की संभावना है। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। टूटी सड़कों की मरम्मत करा दी गई है और सफाई की पूरी व्यवस्था की जा रही है।
मान्यता है कि पितरों की मुक्ति की कामना को लेकर यहां आने वाले लोग पहले पुनपुन में पिंडदान करते हैं। इसके बाद पवित्र फल्गु नदी के देवघाट पर तर्पण और पिंडदान से पितृमुक्ति यज्ञ का अनुष्ठान करते हैं। गया में वर्तमान समय में 45 वेदियां हैं, जहां लोग पिंडदान कर अपने पुरखों का श्राद्ध करते हैं।
पिंडदान का कर्मकांड कराने वाले श्यामलाल ने आईएएनएस को बताया कि भादों पूर्णिमा से पिंडदान का विधान प्रारंभ हो जाता है जो अश्विन माह के एक पक्ष तक चलता है। प्रतिदिन नियम के अनुसार पिंड देने वाले वाले लोग विभिन्न वेदियों के पास जाकर पिंडदान करते हैं। आमतौर पर सभी वेदियों पर तिल, गुड़, जौ आदि से पिंड दिया जाता है।
औरंगाबाद से पिंडदान करने आए रामराज शर्मा ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार वह भी यहां आए हैं। उनका मानना है कि अगर हमारे पिंडदान से सभी पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है तो सभी को ऐसा करना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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