मधु कोड़ा का भंडाफोड़ करने वाले दुर्गा ओरांव की मुश्किलें
नित्यानंद शुक्ला
रांची, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के कथित 2,500 करोड़ रुपये की आर्थिक भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करने वाले दुर्गा ओरांव के लिए जीवन अब आसान नहीं रह गया है। इस घटना के दो साल बाद भी ओरांव का जीवन सुरक्षा और गोपनीयता से घिरा हुआ है।
छत्तीस वर्षीय ओरांव का असली नाम दुर्गा मुंडा है। उन्हें लंबे समय तक छुपकर रहना पड़ा था और फिर उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया। उनके वकील का कहना है कि सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों ने ओरांव के जीवन को कठिन बना दिया है।
उन्होंने अपनी पहचान छुपाने के लिए बदले हुए उपनाम के साथ एक जनहित याचिका दायर की थी।
ओरांव एक किसान परिवार से हैं। वह जमीन की छोटी-मोटी दलाली कर अपनी आजीविका चलाते रहे हैं। रांची के मारबाडी में उनका दो कमरों का एक घर हैं, जहां वह अपनी पत्नी, दो बच्चों, माता-पिता और तीन भाईयों के साथ रहते हैं। उनके पास एक साइकिल भी है।
झारखण्ड उच्च न्यायालय के निर्देश पर राज्य सरकार ने उन्हें हथियारों से लैस छह सुरक्षाकर्मी मुहैया कराए हैं। तब से ओरांव जहां भी जाते हैं, सुरक्षाकर्मी उनके साथ ही रहते हैं। उनके लिए कहीं आना-जाना मुसीबत बन गया है।
ओरांव ने आईएएनएस से कहा कि यदि उनके पास यात्रा के लिए एक वाहन और एक बेहतर घर होता तो उन्हें इतनी दिक्कत न होती। वह कहते हैं कि यदि उनके पास आय का स्थायी जरिया हो तो अच्छा है।
ओरांव के वकील राजीव कुमार ने आईएएनएस से कहा, "हम राज्य सरकार से अपील करते हैं कि सुरक्षा कारणों से दुर्गा ओरांव को एक वाहन और एक घर उपलब्ध कराया जाए। इसी वजह से ओरांव अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे थे।"
ओरांव की जनहित याचिका से कोड़ा और झारखण्ड के छह पूर्व मंत्रियों की संपत्ति केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के घेरे में आई। याचिका दायर करने के बाद अक्टूबर 2008 से वह सुरक्षा कारणों से भूमिगत थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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