घाटी के संकट से सीख लेने की जरूरत : उमर

नई दिल्ली, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी कार्यशैली की आलोचना को खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि राज्य के सामने खड़ी मुख्य समस्या राजनैतिक है और घाटी में पिछले कुछ महीनों से पैदा हुए संकट से सीख लेने की जरूरत है।

सीएनएन-आईबीएन समाचार चैनल के साथ एक साक्षात्कार में अब्दुल्ला ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान उठने वाले नारे उनकी सरकार के खिलाफ नहीं थे। और जो लोग इस समस्या को उनकी कार्यशैली से जोड़ रहे हैं, वे मुद्दे की जटिलता को हल्का कर रहे हैं।

अब्दुल्ला ने कहा, "हमें जम्मू एवं कश्मीर का एक राजनीतिक समाधान निकालने की जरूरत है। इसके लिए पाकिस्तान से भी संवाद शुरू किया जाए और घरेलू स्तर पर भी संवाद शुरू किया जाए। शासन की हमारी शैली पर ध्यान केंद्रित कर आप मुख्य मुद्दे को भटका रहे हैं। आपने किस विरोध प्रदर्शन में मेरी सरकार के खिलाफ नारा उठते हुए देखा? जो नारे लग रहे थे, वे थे - हमें आजादी चाहिए, गो इंडिया गो। अब इन नारों का मेरे शासन की शैली से क्या लेना-देना है।"

अब्दुल्ला ने कहा, "इस संकट से सीख लेने की जरूरत है। मुझे सीख लेनी है, राज्य को सीख लेनी है और भारत सरकार को महत्वपूर्ण सीख लेनी है। यह कह कर इस मुद्दे की जटिलता को हल्का मत कीजिए कि यदि मैं शासन की अपनी शैली बदल दूं तो चमत्कारिक ढंग से सारा कुछ बेहतर हो जाएगा।"

नेशनल कांफ्रेंस की सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाए जाने की मांग को जायज ठहराते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि सेना को किसी ने भी जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

अब्दुल्ला ने कहा, "दुर्भाग्यवश एएफएसपीए एक क्रूर कानून है। यह कानून घाटी और राज्य के कुछ हिस्सों में अपनी उपयोगिता खो चुका है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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