उमर के समर्थन में आए राहुल, एएफएसपीए पर साधी चुप्पी (राउंडअप)
राज्य के तीन दिवसीय दौरे के समापन मौके पर पत्रकारों से बातचीत में राहुल ने हालांकि कश्मीर में सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाए जाने के बारे में कुछ कहने से इंकार कर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी लेकिन इसके लिए वह न तो वह झुकेगी और न ही अपने सम्मान से समझौता करेगी।
कोलकाता में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, "मुझे लगता है कि उमर चुनौतियों से जूझ रहे हैं। कश्मीर चुनौतियों से भरा राज्य है। उन्हें समय और समर्थन दिए जाने की जरूरत है।"
उमर के इस्तीफे की उठ रही मांगों के बारे में उन्होंने कहा, "उमर नेशनल कांफ्रेंस के चुने हुए नेता हैं। हम उनके साथ मिलकर गठबंधन सरकार चला रहे हैं लेकिन जहां तक मुख्यमंत्री का सवाल है, यह उनकी पार्टी को तय करना है।"
युवक कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) से युवाओं को जोड़ने की उनकी मुहिम के बारे में यह पूछे जाने पर कि क्या वे इस मुहिम जम्मू एवं कश्मीर में भी चलाएंगे तो उन्होंने कहा, "मेरी यह मुहिम पूरे देश में चल रही है और इसी के तहत मैं पश्चिम बंगाल में आया हूं। जम्मू एवं कश्मीर भी देश का अभिन्न अंग है। निश्चित तौर पर मैं वहां भी जाऊंगा और युवाओं को राजनीति में आने और राजनीतिक व्यवस्था में शामिल होने के लिए प्रेरित करूंगा।"
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती द्वारा जम्मू एवं कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर उनसे हस्तक्षेप करने की मांग के बारे में पूछे जाने पर राहुल ने कहा, "हर कोई चाहता है कि हर मुद्दे पर मैं हस्तक्षेप करूं। कोई राष्ट्रमंडल खेलों में तो कोई कश्मीर मसले पर हस्तक्षेप की मांग करता है। लेकिन मेरा रुख बड़ा स्पष्ट है। मैं एक समय में एक ही काम करना पसंद करता हूं। वर्तमान में मैं युवाओं को राजनीति से जोड़ने और एनएसयूआई और युवक कांग्रेस में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम करने की मुहिम में लगा हूं।"
उन्होंने कहा, "कश्मीर की समस्या अंशकालिक नहीं है बल्कि पूर्णकालिक है। यदि मैं इसमें शामिल होता हूं तो मुझे पूर्णकालिक तौर पर इसमें लगना होगा। मैं फिलहाल युवाओं को राजनीति से जोड़ने की मुहिम में जुटा हूं। यह बड़ा ही महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में यह देश की राजनीति की दिशा बदल देगी।"
राहुल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पश्चिम बंगाल में रेल मंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के साथ आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का गठबंधन रहेगा लेकिन इसके लिए पार्टी न तो सम्मान से समझौता करेगी और न ही झुकेगी।
उन्होंने कहा, "वाम मोर्चे को हराने के लिए हम तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। वाम मोर्चा यहां की एक बड़ी समस्या है। ममताजी वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने मेरे पिताजी के साथ काम किया है। मैं उनका सम्मान करता हूं। लेकिन हम सम्मान के साथ उनकी पार्टी के साथ गठबंधन चाहते हैं। हम अपना सिर नहीं झुकाने जा रहे हैं।"
राहुल एक सवाल पर कहा कि भूमि अधिग्रहण का लाभ गरीबों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन अधिनियम पर तृणमूल कांग्रेस से मतभेद केवल अधिग्रहण के लिए ली जाने वाली जमीन के प्रतिशत पर है।
उन्होंने कहा, "मेरे अंदर सभी भारतीयों के लिए सहानुभूति है। लेकिन देश में ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें अन्य की तरह लाभ नहीं मिलता। मैं चाहता हूं कि भूमि अधिग्रहण का लाभ गरीबों को भी मिले।"
राहुल ने हरियाणा में किए गए भूमि अधिग्रहण की तारीफ करते हुए कहा, "हरियाणा सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए अच्छी योजना बनाई है। अधिग्रहण का लाभ वहां सभी लोगों को मिला है।"
उन्होंने कहा, "हम गरीबों को फायदा पहुंचाए बिना उनकी भूमि अमीरों को नहीं दे सकते। सड़कों और आधारभूत संरचना के विकास के लिए भूमि की जरूरत है, लेकिन गरीबों को उनका हक मिलना चाहिए।"
गांधी ने उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार द्वारा किसानों की भूमि कम दरों पर लिए जाने की तीखी आलोचना करते हुए कहा, "सरकार 400 रुपये प्रति मीटर की दर से भूमि अधिग्रहण कर अमीरों को 1000 रुपये की दर से बेच रही है। "
कांग्रेस ने स्वीकार किया कि गरीबी और लोगों से संपर्क की कमी देश में नक्सल समस्या के अहम कारण हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि इससे निपटने के लिए राजनीतिक संपर्क जरूरी है।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि नक्सलवाद कई जटिल परिस्थितियों का परिणाम है। गरीबी निश्चित रूप से एक मुद्दा है और संपर्क की कमी भी इसकी एक वजह है।"
उन्होंने कहा, "देश के ज्यादातर हिस्सों में हमने संपर्क के स्तर में सुधार किया है। युवाओं के साथ राजनीतिक संपर्क में सुधार की आवश्यकता है ताकि लोग मुख्यधारा का हिस्सा बन सकें।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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