अमेरिका की वीजा शुल्क में बढ़ोतरी

अरुण कुमार

वाशिंगटन, 16 सितम्बर (आईएएनएस)। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के दो विशेषज्ञों ने कहा है कि वीजा शुल्कों में की गई बढ़ोतरी भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास लाने के साथ ही खुले विश्व बाजार में अमेरिकी नजरिए के बारे में गलत संदेश दे सकती है।

पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ सदस्य जैकब एफ. कीर्केगार्ड और अरविंद सुब्रमण्यम ने विदेश नीति से संबंध एक पत्रिका में वीजा शुल्क में की गई बढ़ोतरी पर लिखा है, "दुख की बात है कि इस मुद्दे पर अमेरिका में राजनीति अच्छी हो रही है, लेकिन यह नीति गलत है।"

वरिष्ठ सदस्यों के मुताबिक, "इस फैसल से राजस्व में वृद्धि नहीं बल्कि अमेरिकी की प्रतियोगापूर्ण छवि को नुकसान पहुंचेगा और भारत के साथ रिश्ते खराब होंगे। इस सबसे ऊपर इससे खुले विश्व बाजार के बारे में अमेरिकी रुख का मतलब लगत निकलेगा।"

उन्होंने लिखा है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत-अमेरिका 'कूटनीतिक सहयोग' बढ़ाने की घोषणाओं के बावजूद यह कदम भारत के सबसे शक्तिशाली घरेलू आर्थिक पहचान को हतोत्साहित करता है। यदि भारत ने अमेरिका से अपना सूचना प्रौद्योगिकी का कारोबार समेट लिया तो यह नुकसान अमेरिका को किसी भी राजनीतिक लाभ या वीजा शुल्क से राजस्व जुटाने की योजना पर भारी पड़ेगा।

वीजा शुल्क ने नए नियमों के तहत पचास या पचास से अधिक कर्मचारियों को रखने वाली कंपनियों के एच-1बी और एल-1 अप्रवासी वीजा शुल्क में क्रमश: 2,000 और 2,250 डॉलर की बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव से मौजूदा वीजा शुल्क में दोगुने की वृद्धि हो गई है।

इससे अमेरिका में सूचना प्रौद्योगिकी के कारोबार में अग्रणी भरतीय कंपनियों को सर्वाधिक नुकसान होगा। अमेरिकी सरकार को उम्मीद है कि इस नए वीजा शुल्क से उसके राजस्व में 13.5 करोड़ डॉलर की वृद्धि होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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