रिजर्व बैंक ने महंगाई पर काबू के लिए प्रमुख दरें बढ़ाईं

समीक्षा जारी करते हुए आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि देश का आर्थिक विकास स्थिर होने के कारण उच्च महंगाई के साथ औद्योगिक उत्पादन की उच्च दर चिंता का विषय है। सुब्बाराव ने कहा, "मुद्रास्फीति की दर काफी ऊपर चली गई थी लेकिन कुछ महीने से यह अब भी ऊंची बनी हुई है। खाद्य वस्तुओं की कीमते अब भी चिंता का विषय है। अगस्त में इनकी दर 14 फीसदी थी।"
उन्होंने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति की दर सामान्य स्थिति में पांच से साढ़े पांच फीसदी से अब भी काफी ऊपर है। इसलिए मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने वाली मौद्रिक नीतियों को प्रभावी बनाने की जरूरत है। यह अर्ध तिमाही मौद्रिक समीक्षा ऐसे समय में जारी हुई है जबकि देश के औद्योगिक उत्पादन की दर अगस्त में 13.8 फीसदी और इससे पूर्व के माह में 7.1 फीसदी दर्ज की गई। अगस्त में हालांकि वार्षिक मुद्रास्फीति की दर 9.78 फीसदी से घटकर 8.51 फीसदी हो गई।
इससे पूर्व की समीक्षा में आरबीआई ने बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाए थे। उसने दो प्रमुख दरों में वृद्धि कर दी थी जिसके परिणामस्वरूप ऋण और जमा पर ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना जताई गई थी। जनवरी में मौद्रिक नीति को कड़ा बनाने की शुरू कयावद के क्रम में दरों में वृद्धि का यह पांचवा मौका है।
रेपा दर वह दर होता है जिस दर पर व्यावसायिक बैंक रिजर्व बैंक से उधार लेते हैं। इस दर में वृद्धि से व्यावसायिक बैंकों के लिए उधार लेना महंगा हो जाएगा। फलस्वरूप में बैंक अपने ग्राहकों के लिए ऋण महंगे कर कसते हैं। इसी तरह रिवर्स रेपो दर वह दर होती है जिस दर रिजर्व बैंक, व्यावसायिक बैंकों से उधार लेता है। इस दर में वृद्धि से व्यावसायिक बैंकों के लिए रिजर्व बैंक के पास धन रखना फायदेमंद होगा। इस तरह उनके पास ग्राहकों को ऋण देने के लिए धन की उपलब्धता में कमी आएगी। सुब्बाराव ने कहा कि इन दरों में वृद्धि से विकास पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications