वर्तमान भूमि अधिग्रहण अधिनियम अप्रासंगिक : अजित सिंह
चौधरी अजित सिंह बुधवार को पार्टी महासचिव अनुराधा चौधरी के आवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हकूमत ने वर्ष 1894 में निजी सम्पत्ति/ भूमि के अनिवार्य अधिग्रहण के घोषित लक्ष्य के साथ सार्वजनिक उद्देश्य के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 पारित किया था।
वर्ष 1949 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने भूमि अधिग्रहण के कानून के रूप में अधिग्रहण अधिनियम 1894 को अंगीकार किया। हालांकि 1894 के अधिनियम में अनेक संशोधन किए गए हैं लेकिन मुआवजे का निर्धारण करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया और मापदंड अभी भी लगभग ज्यों का त्यों है।
उन्होंने कहा कि इसमें सार्वजनिक उद्देश्य की परिभाषा इतनी अस्पष्ट और व्यापक है किसी भी उद्देश्य के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा सकता है। जिसके कारण मुआवजे का निर्धारण तुष्टिपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि नए कानून की मांग को लेकर राष्ट्रीय लोकदल ने लोकसभा में बहस के लिए एक मसौदा तैयार किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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