यमुना में उफान से निखरी ताज की खूबसूरती (लीड-1) (फोटो सहित)
मुगल इतिहासकार आर. नाथ ने कहा, "ताज महल की मूल अवधारणा में यमुना को इसका अभिन्न हिस्सा माना गया है और उसका अलग रहना कोई मायने नहीं रखता। नदी का पानी इस यादगार इमारत की पिछली बुनियाद को छूते हुए दिखना चाहिए, ताकि पूरा ढांचा बेहद खूबसूरत दिखे।"
नदी और ताज की बुनियाद के बीच खालीपन को पुल भरता हुआ दिख रहा है तथा मुख्यधारा से बनावटी बाग के बीच दूरी बनी हुई है।
धरोहर प्रेमी सुधीर गुप्ता ने कहा, "अगर बादशाह अभी जिंदा होते और किले के दायरे से ताज को देखते तो बहुत खुश होते, क्योंकि वह ऐसा ही नजारा देखना चाहते थे।"
बुधवार की सुबह यमुना का जलस्तर 495 फुट को पार कर गया और विवादित ताज कॉरिडोर परियोजना के काफी हिस्से डूब गए।
इस बीच यमुना का जलस्तर बढ़ता देख कुछ लोगों ने ताज महल को खतरा पहुंचने की चिंता जताई है।
भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के अधिकारी इंदुधर द्विवेदी ने हालांकि कहा, "यमुना के बढ़ते पानी से ताज को नुकसान पहुंचने की आशंका नहीं है। यमुना का पानी छुए, इसीलिए यहां ताज का निर्माण हुआ था।"
प्रसिद्ध रंगकर्मी जीतेंद्र रघुवंशी ने कहा, "नदी में जब पानी लबालब हो जाता है, तब ताज की भव्यता और बढ़ जाती है। खासकर तब, जब रात में आसमान साफ और नीला हो, चांद एवं तारे मुस्करा रहे हों। ऐसे में स्वाभाविक रूप से रोमांटिक वातावरण बन जाता है और भावों की असंख्य धाराएं फूट पड़ती हैं।"
सिर्फ ताज महल ही नहीं, आगरा किला, एतमादुद्दौला, चीनी का रोजा और मेहताब बाग जैसे अन्य स्मारक सहित नदी के तट लोगों के हुजूम को अपनी ओर खींच रहे हैं।
वन्यजीवों के छायाकार ललित राजोरा ने कहा, "बारिश में धुलकर इमारतें चौंधिया रही हैं। दूसरी तरफ से शहर का दृश्य अद्भुत दिखता है।"
इस बीच ज्यादातर लोग नदी के इस हाल से खुश हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्वाभाविक तौर पर सचेत कर दिया गया है और वे जल्द राहत के लिए इंद्र देवता से प्रार्थना कर रहे हैं।
शहर की दर्जन भर कालोनियां बाढ़ से प्रभावित हो चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता दीपक खरे कहते हैं, "बुरी स्थिति तो अब आने वाली है। नदी का जलस्तर गुरुवार को दोपहर बाद 500 फुट तक बढ़ने की आशंका है।"
उल्लेखनीय है कि मथुरा और वृंदावन के निचले इलाकों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। तटवर्ती खेतों में पानी फैल गया है। इस कारण काफी फसलें बर्बाद हुई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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