विस्फोटकों को नष्ट करने वाली 'पानी की धार'
'स्टिंग्रे' नाम के उस यंत्र को सांडिया नेशनल लैब्स ने तैयार किया है। लगभग 3000 'स्टिंग्रे' अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लिए भेजे गए हैं।
समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक 'स्टिंग्रे' मुख्य रूप से पानी और विस्फोटक से भरे होते हैं। विस्फोटक में धमाका करने के बाद पानी की धार किसी कटार की तरह काम करती है। यह धार इतनी तेज होती है कि इस्पात को भी काट सकती है।
इस यंत्र को विकसित करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले सांडिया स्थित एनर्जेटिक सिस्टम्स रिसर्च डिपार्टमेंट के प्रबंधक ग्रेग श्कारर कहते हैं, "पानी की धार इतनी तेज होती है कि यह देसी बमों (आईईडी) को भी भेद सकती है।"
'स्टिंग्रे' को आईईडी के बिल्कुल करीब रखा जा सकता है या फिर उसे कुछ दूरी पर रखकर भी आईईडी को निष्क्रिय किया जा सकता है।
इसके एक विशेष आकार दिया गया है क्योंकि वैज्ञानिक नहीं चाहते थे कि विस्फोट के बाद निकलने वाली पानी की धार की शक्ति बेकार हो जाए। यह एक दिशा में वार करती है और अपने सामने आने वाली किसी भी चीज तो भेद सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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