कश्मीर में स्थायी शांति सिर्फ बातचीत से संभव : प्रधानमंत्री (लीड-2)
कश्मीर के संकट पर विचार विमर्श के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि घाटी में कुछ प्रदर्शन 'स्वाभाविक' और 'आवेशपूर्ण' हैं लेकिन अन्य कुछ खास गुटों द्वारा योजनाबद्ध रूप से किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) का कोई उल्लेख नहीं किया। बहुत से कश्मीरी इसे हटवाना चाहते हैं क्योंकि यह सुरक्षा बलों को विशेष शक्तियां देता है।
हिंसा में प्राण गंवाने वाले लोगों के सम्मान में मिनट भर का मौन रखने और प्रार्थना के साथ शुरू हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि उनकी सरकार हर उस व्यक्ति से बातचीत करने को राजी है, जो हिंसा छोड़ दे।
उन्होंने कहा, "हमने बातचीत की प्रक्रिया के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए राज्य सरकार को भी शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने को कहा है। केन्द्र सरकार इसके लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी।"
प्रधानमंत्री के आवास सात रेसकोर्स पर हुई इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, वाम नेता प्रकाश करात तथा भारतीय जनता पार्टी के लालकृष्ण आडवाणी और नितिन गडकरी सहित अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। यह बैठक कश्मीर घाटी की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी। जहां गत 11 जून से जारी हिंसक प्रदर्शनों में अब तक 88 लोग मारे जा चुके हैं।
जम्मू एवं कश्मीर की दोनों प्रमुख पार्टियों नेशनल कान्फ्रेंस तथा पीपुल्स डेमोकेट्रिक पार्टी (पार्टी) ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने पहले भी कहा है और फिर दोहरा रहा हूं-कश्मीर में स्थायी शांति और समृद्धि का एकमात्र रास्ता बातचीत और विचार-विमर्श है।"
उन्होंने कहा कि यह यकीनन बहुत त्रासद बात है कि हमारे कुछ लोगों ने हाल के कुछ दिनों में यह रास्ता छोड़ दिया है। युवकों और महिलाओं-यहां तक कि बच्चों को प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरते देख वह स्तब्ध और दुखी हैं। इनमें से कुछ विरोध प्रदर्शन जहां स्वाभाविक या आवेशपूर्ण रहे हैं, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कुछ प्रदर्शनों को कुछ गुटों ने योजनाबद्ध रूप से कराया है।
उन्होंने हिंसा में घायल होने वालों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की। उन्होंने घाटी में हुई मौतों, लोगों, पुलिसकर्मियों या सुरक्षा बलों की कार्रवाई में घायल होने वालों, आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी में पड़ रहे व्यवधान तथा टूअर ऑपरेटरों, सेब के किसानों, दिहाड़ी मजदूरों तथा हाउसबोट के मालिकों द्वारा उठाई जा रही तकलीफों पर खेद जाहिर किया।
अमेरिका में कुरान के कथित अनादर की रपट के बाद सोमवार को भड़की हिंसा में मारे गए 18 लोगों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "मुझे पक्का यकीन है कि ईद के दौरान उसके बाद हजारों मील दूर बैठे एक गुमराह व्यक्ति की कथित कृत्य की वजह से हुए दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रमों का हम सभी को अफसोस है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें एक-दूसरे से बात करनी होगी। जिन्हें सरकार से शिकायत है उन्हें प्रशासन से बात करनी होगी। लेकिन यह भी सच है कि अर्थपूर्ण बातचीत तभी संभव है जब वातावरण हिंसा और टकराव से मुक्त हो।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारे राज्य की जनता विशेषकर युवकों से हिंसा त्यागने की अपील कर चुकी हैं। उन्होंने कहा, "मैं वह अपील दोहराता हूं।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले महीनों और हफ्तों से कई राजनीतिक दलों के विभिन्न नेताओं ने उन्हें कश्मीर मसले के बारे में लिखा है या इस बारे में बात की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की विचार-विमर्श की इस प्रक्रिया के तहत वह समझते हैं कि यह उचित होगा कि जम्मू एवं कश्मीर के जटिल मसले पर विविध राजनीतिक दलों से मार्गदर्शन लिया जाए। उन्होंने कहा, "इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मुझे आपके विवेक, ज्ञान और अनुभव से लाभान्वित होने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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