भारत में आघात मौत का दूसरा बड़ा कारण
अपोलो अस्पताल के न्यूरोसर्जन पी.एन. रेनजेन ने आईएएनएस से कहा, "आज की तारीख में बुर्जुगों के साथ-साथ युवा भी आघात का शिकार हो रहे हैं। इसके लिए खराब जीवनशैली को दोषी माना जा सकता है। आघात आमतौर पर खराब जीवनशैली वाले लोगों को ही होता है।"
"उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापा से जुड़े मामले बढ़े हैं। इन कारणों ने आघात को देश में दिल की अन्य बीमारियों के बाद मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बना दिया है।"
आघात के लिए धूम्रपान को सबसे बड़ा कारण माना जा सकता है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में दिल के आघात को 'स्टोक्स' या फिर 'पेरीफेरल आर्टिरियल डिजीज' (पीएडी) कहा जाता है। इसके कारण शरीर की धमनियों की संवहन क्षमता में रुकावट आती है।
रेनजेन ने कहा, "40 वर्ष की उम्र के 10 से 15 फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रसित हैं।"
इस संबंध में अपोलो अस्पताल के वस्कुलर सर्जन रमेश त्रिपाठी कहते हैं कि इस बीमारी का शुरुआती इलाज सावधानी है। अगर किसी को गहरा आघात पहुंचता है तो उसे पांच घंटे के भीतर अस्पताल लाना बेहद जरूरी है। इस अवधि में धमनियों में जमे थक्के को खत्म किया जा सकता है।
आघात के लक्षणों में चेहरे की कमजोरी या सुन्न हो जाना, हाथों या पांव की कमजोरी, दृष्टता में कमी, चलने में तकलीफ, चक्कर आना, संतुलन बिगड़ना, बिना कारण के तेज सिरदर्द और अचेत हो जाना शामिल है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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