कूनो अभयारण्य में गूंजेगी चीतों की दहाड़

भोपाल, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के चंबल इलाके के पालपुर कूनो अभयारण्य में आने वाले कुछ वर्षो में अफ्रीकी चीतों की दहाड़ सुनाई देने लगेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चीतों को फिर से यहां लाकर बसाने को सैद्धांतिक मजूरी दे दी है।

प्रदेश में अंतिम बार 62 वर्ष पहले, 1948 में चीता देखा गया था। वर्तमान में प्रदेश और देश में कहीं भी चीता नजर नहीं आता। इतना ही नहीं, इस दुर्लभ वन्यप्राणी का एशिया में ही अस्तित्व खत्म हो चुका है।

भोपाल प्रवास पर आए भारतीय वन्य प्राणी न्यास के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित वनमंत्री सरताज सिंह व प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में 'प्रोजेक्ट टाइगर' पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका महाद्वीप मे चीते बहुतायत में हैं और इस वन्यप्राणी के भारत में पुर्नस्थापन के लिए प्रयास जारी है।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने चीते को बसाने के लिए देश में तीन स्थानों का चयन किया है। इसमें से मध्य प्रदेश के दो, पालपुर-कूनो अभयारण्य और भैंसादेही अभयारण्य व राजस्थान का एक शाहगढ़ क्षेत्र है। विशेषज्ञों का मत है कि पालपुर-कूनो एशियाई शेर, बाघ और चीता के लिए आदर्श क्षेत्र है।

पालपुर-कूनो में चीतों की पुर्नस्थापना की 10 वर्षीय योजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान है, इस राशि का वहन केंद्र व राज्य सरकार मिलकर करेंगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चीतों की बसाहट पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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