ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिग के स्पर्श पर रोक

मिली जानकारी के मुताबिक ज्योतिर्लिंग का पिछले कुछ अरसे से क्षरण शुरू हुआ है और अवशेष भी निकलने लगे हैं। इन स्थितियों से चिंतित मंदिर प्रबंधन, साधू-संतों का एक सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें जिला प्रशासन ने सभी से राय मांगी कि क्षरण रोकने के लिए क्या किया जाए। इस पर लोगों ने सुझाव दिए और उसी के आधार पर ज्योतिर्लिंग पर सीधे जलाभिषेक सहित पूजन सामग्री चढाने के साथ स्पर्श पर रोक लगा दी है।

कलेक्टर डी.डी. अग्रवाल ने आईएएनएस को बताया कि सभी की रायशुमारी से ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए यह व्यवस्था की गई है। श्रद्घालु जलाभिषेक शिवलिंग की जलेरी पर कर सकते हैं, इसके गर्भगृह में दो ताम्रपात्र रखे गए हैं, ऐसा करने से शिवलिंग को किसी तरह की क्षति नहीं होगी।

इसके साथ ही फूल, प्रसाद और नारियल आदि के सीधे शिवलिंग पर अर्पण करने पर भी रोक लगा दी गई है। जलाभिषेक भी अपरान्ह चार बजे तक ही किया जा सकेगा। यह निर्णय तमाम धर्माचायरें, मंदिर प्रबंध समिति से विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इस निर्णय पर मंगलवार से अमल भी शुरू हो गया है।

दूसरी ओर राज्य सरकार भी ज्योतिर्लिंग के क्षरण से चिंतित है और उसने इसके लिए शंकराचायरें व धर्माचार्यों से परामर्श लेने का निर्णय लिया है। इसके लिए धर्मस्य मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को अधिकृत किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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