ये है भाजपा-झामुमो की प्रेम कहानी
नई दिल्ली, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। राजनीतिक दलों की आपसी प्रेम कहानी भी अजीब होती है। इस कहानी में मिलना और बिछुड़ना लगा रहता है। अब तक एक दूसरे से दुश्मनों जैसा सलूक करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) एक बार फिर एक हो गए हैं।
यह प्रेम कहानी कितने दिनों तक चलेगी यह तो भविष्य की गर्त में है लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति में न तो कोई स्थायी दोस्त होता है और न ही कोई स्थायी दुश्मन।
झारखण्ड में भाजपा ने इस दफा झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन पर फिर से एतबार करते हुए मंगलवार को सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। महज तीन महीने पहले की बात है जब भाजपा द्वारा लोकसभा में अप्रैल माह में लाए गए कटौती प्रस्ताव पर सोरेन के उसके खिलाफ और केंद्र सरकार के समर्थन में मतदान करने से भाजपा बौखला गई थी और उसने राज्य में सोरेन सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
समर्थन वापसी के कारण सोरेन को अपनी सरकार गंवानी पड़ी और 30 मई को उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद राज्य में एक बार फिर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
भाजपा और झामुमो के बीच प्रेम कहानी की शुरुआत गत वर्ष विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ हुई थी। भाजपा ने सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया था और वह मुख्यमंत्री बने। भाजपा के इस फैसले की जबरदस्त आलोचना हुई कि उसने सत्ता की खातिर एक दागी का दामन थाम लिया। यह वही भाजपा थी जिसने वर्ष 2004 में सोरेन के खिलाफ हत्या के एक मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद एक सप्ताह तक संसद की कार्यवही नहीं चलने दी थी।
मजे की बात यह है कि सोमवार की शाम शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सोरेन और पार्टी के वरिष्ठ नेता टेकलाल महतो रांची स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचकर भाजपा नेताओं को झामुमो के समर्थन की चिट्ठी थमाई और इसके बाद मंगलवार को अर्जुन मुंडा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद सोरेन से आशीर्वाद प्राप्त करने उनके निवास पहुंचे। ज्ञात हो कि हेमंत सोरेन वही विधायक हैं जिन्होंने खुले आम भाजपा के साथ सरकार बनाने की कोशिशों की मुखालफत की थी।
बहरहाल, सत्ता चीज ही कुछ ऐसी होती है जो दुश्मन को दोस्त और दोस्त को दुश्मन बनाने में देरी नहीं करती है। यही वजह है कि एक बार फिर से दोनों एक हो गए हैं। इसलिए यह कहना वाजिब होगा कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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