माओवादी सातवीं बार हारे प्रधानमंत्री का चुनाव (लीड-1)
सुदेशना सरकार
काठमांडू, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। रिश्वत के आरोपों और हत्या के एक मामले में अपने एक सांसद को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने से शर्मसार नेपाली माओवादी पार्टी को और शर्मसार तब होना पड़ा जब मंगलवार को सातवीं बार भी वह प्रधानमंत्री पद का चुनाव हार गई। इसके साथ ही देश एक गंभीर राजनीतिक संकट में उलझ गया है।
माओवादी पार्टी के अध्यक्ष पुष्प कमल दहाल प्रचंड सातवें दौर के चुनाव में केवल 252 वोट ही हासिल कर सके। जहां 110 सांसदों ने प्रचंड के खिलाफ वोट दिया, वहीं 159 सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इसके अलावा इस बार सबसे कम 521 सांसद ही मतदान के लिए आए।
प्रधानमंत्री पद के दूसरे उम्मीदवार नेपाली कांग्रेस के राम चंद्र पौडेल की स्थिति पहले से और खराब रही। उन्हें सातवें दौर के चुनाव में केवल 119 वोट ही हासिल हो पाया। 245 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट दिया और 151 तटस्थ बने रहे।
नेपाल में प्रधानमंत्री की दौड़ तब से शुरू हुई है, जब प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने 30 जून को इस्तीफा दे दिया। लेकिन इस पद के लिए पिछले दो महीने से जारी चुनाव का सातवां चक्र समाप्त हो जाने के बाद भी प्रधानमंत्री का निर्वाचन नहीं हो पाया है।
नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट के 109 सांसद हैं। यह पार्टी आंतरिक समस्याओं के कारण प्रधानमंत्री की दौड़ से बाहर है। इसने तब तक तटस्थ रहने का निर्णय लिया है, जब तक कि दोनों उम्मीदवार मैदान से हट नहीं जाते।
चौथा पक्ष तराई की पार्टियों का है। इस समूह के पास 82 सांसद हैं। ये सांसद प्रचंड की सत्ता वापसी में मदद कर सकते थे। लेकिन यह समूह भी तटस्थ बना हुआ है। लेकिन मंगलवार के चुनाव में तराई पार्टी के एक साझेदार ने गुट से अलग होकर प्रचंड के पक्ष में मतदान किया।
पूर्व विदेश मंत्री उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाले मधेसी जनाधिकार फोरम नेपाल के पास 25 सांसद हैं। यह पार्टी अब माओवादियों के साथ गठबंधन कर रही है। लेकिन तराई की अन्य पार्टियां अभी भी प्रचंड के खिलाफ हैं, खासतौर से पिछले सप्ताह एक आडियो टेप का मामला सामने आने के बाद से ये पार्टियां माओवादियों से और दूर हो गई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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