रिश्वत मामले की जांच करेगी नेपाल सरकार
सुदेशना सरकार
काठमांडू, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए मंगलवार के सातवें दौर के चुनाव के पूर्व नेपाल की कार्यवाहक सरकार ने कहा कि वह उस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित करेगी, जिसमें विपक्षी माओवादी पार्टी द्वारा सांसदों के वोट खरीदने के लिए एक चीनी 'मित्र' से कथित रूप से लाखों रुपये की मांग की गई थी।
एक आडियो टेप के बारे में मीडिया में आई खबरों पर देर से प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए मंत्रिपरिषद ने कहा कि संसद के सभापति, सुबास नेमबांग द्वारा राय-मशविरा करने के बाद आडियो टेप की जांच कराई जाएगी।
आडियो टेप में पूर्व माओवादी मंत्री कृष्ण बहादुर महारा की आवाज रिकॉर्ड है। टेप में महारा, प्रधानमंत्री चुनाव जीतने हेतु तराई की पार्टियों के 50 सांसदों के वोट खरीदने हेतु 50 करोड़ नेपाली रुपये की मांग कर रहे हैं।
माओवादियों ने इस आरोप को झूठा करार दिया है और टेप को फर्जी बताया है। इसके साथ ही माओवादियों ने घोषणा की है कि वे अपने स्तर पर इस मामले की जांच करेंगे।
सरकार की ओर से जांच कराने की बात तब कही गई है, जब भारत सरकार ने कहा है कि उसने रिश्वत के आरोपों को गंभीरता से लिया है। जबकि माओवादी इस टेप के पीछे भारत को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
माओवादी, रिश्वत विवाद के अलावा कई अन्य कारणों से भी चुनाव पूर्व संदेह के दायरे में आ गए हैं। एक अन्य माओवादी सांसद बालकृष्ण धौंगल हत्या के आरोप में दोषी ठहराए जाने के कारण सुर्खियों में हैं।
माओवादियों के जन युद्ध के दौरान ओखलधुंगा जिले में उज्वल कुमार श्रेष्ठ की हत्या का दोषी पाए जाने के बाद पूर्व गुरिल्ला पार्टी को शर्मशार होना पड़ा है।
यद्यपि यह हत्या 12 साल पूर्व हुई थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने धौंगल को जनवरी में दोषी ठहराया। उस समय इस फैसले की ओर लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं गया। सर्वोच्च न्यायालय ने हालांकि रविवार को पूर्ण फैसला सुना दिया। फैसले में धौंगल को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। इसे लेकर जनता में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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