सेल की भिलाई इकाई की उत्पादन क्षमता 70 लाख टन होगी
क्षमता विस्तार के लिए भट्टी निर्माण, बार और राड मिल, रेल मिल और सिंटर मशीन लगाने की चार परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।
भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात निर्माता कंपनी की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली इस इकाई की क्षमता फिलहाल 50 लाख टन प्रतिवर्ष है। इस विस्तार योजना के लिए पिछले सप्ताह कंपनी ने चार समूहों से समझौते किए हैं। यह परियोजनाएं 24 से 32 महीनों में पूरी होंगी।
इन समझौतों के अंतर्गत 1,579.14 करोड़ रुपये की लागत से भट्टी निर्माण का सौदा इटली की कंपनी पॉल वर्थ और लार्सन एण्ड टूब्रो के समूह को मिला है। यह काम 28 महीनों में पूरा होगा।
बार और रॉड मिल का काम इटली की ही एक कंपनी डेनियल एण्ड सी एसपीए को मिला है। इस काम की लागत 406 करोड़ रुपये है।
रेल मिल का काम जर्मनी की कंपनी एसएमएस मीर और एबीबी लिमिटेड के समूह को मिली है। इस काम की लागत 1,174 करोड़ रुपये है।
सिंटर मशीन लगाने का काम एल एण्ड टी और ओटोटेक कंपनी के समूह को मिला है। इस सौदे की लागत 639 करोड़ रुपये है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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