स्तनपान नहीं कराने वाली माताओं को मधुमेह का खतरा
टाइप-2 मधुमेह सबसे आम प्रकार का मधुमेह है। बीती शताब्दी की तुलना में इस शताब्दी में स्तनपान नहीं कराने वाली महिलाओं के इस बीमारी के ग्रसित होने की संख्या बढ़ी है।
पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय के मेडिसिन, इपिडेमियोलॉजी और ऑब्सट्रेटिक्स विभाग की डॉक्टर बिमला श्वार्ज ने कहा, "बीती शताब्दी की तुलना में स्तनपान नहीं कराने वाली महिलाओं के इस बीमारी से ग्रसित होने की घटनाएं बढ़ी हैं।"
"टाइप-टू मधुमेह के लिए मुख्य तौर पर खानपान और व्यायाम नहीं करना जिम्मेदार होते हैं। यह बात भी सामने आई है कि स्तनपान कराने से इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। खासतौर पर स्तनपान नहीं कराने वाली महिलाओं को उम्र के दूसरे पड़ाव में इस प्रकार के मधुमेह से ग्रसित होने का खतरा रहता है।"
यह निष्कर्ष 40 से 78 वर्ष की उम्र की 2233 महिलाओं पर किए गए शोध के माध्यम से निकाला गया है। इसमें पता चला है कि अपने बच्चों को एक महीने तक स्तनपान कराने वाली 56 फीसदी महिलाएं इस बीमारी से दूर रही हैं।
इसकी तुलना में बच्चों को स्तनपान नहीं कराने वाली 27 फीसदी महिलाओं को उम्र के इस पड़ाव में मधुमेह ने अपनी चपेट में ले लिया। इनमें वे महिलाएं भी शामिल हैं, जो मां नहीं बन सकीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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