उत्तर भारत के कई हिस्सों में बाढ़ का कहर जारी (लीड-1)

उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन जिलों के सैकड़ों गांवों में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हैं और सैकड़ों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं। प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) के जवान प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के काम में जुटे हुए हैं। बहराइच, लखीमपुर खीरी, गोंडा, सीतापुर, बस्ती और बाराबंकी जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

अब तक बाढ़ से छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि गुरुवार से नदियों का जलस्तर कम हो रहा है।

उत्तराखण्ड स्थित बनबसा बैराज से काफी पानी छोड़े जाने से शारदा और घाघरा का जलस्तर कई जिलों में खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रहा है। कुछ जिलों में गंगा, यमुना, सरयू और राप्ती का जलस्तर भी खतरे के निशान के निकट पहुंच गया है।

बहराइच के कैसरगंज और महसी तहसील के संगवा, समदर, केवलपुर, बांसगढ़ी, अटोडर, देवगंज, पुंगिया, चूली सहित करीब 75 गांव जलमग्न हो गए हैं। करीब 100 गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ से जिले की 1.50 लाख आबादी प्रभावित हुई है और एक व्यक्ति की मौत हुई है। लखीमपुर खीरी के करीब 25 गांव जलमग्न हो गए हैं।

निघासन तहसील के विभिन्न गांवों में बाढ़ से चार लोगों की मौत हुई है। प्रभावित इलाकों में प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है।सीतापुर, पीलीभीत, गोरखपुर, बस्ती, फरु खाबाद, फैजाबाद जिलों में भी बाढ़ प्रभावितों को जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

उधर, दिल्ली में यमुना का जलस्तर अभी तक खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है जिसके कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा टला नहीं है। दिल्ली बाढ़ नियंत्रण विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "यमुना का जलस्तर गुरुवार को 205.77 मीटर तक खिसक गया।"

हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से गुरुवार सुबह लगभग 71,675 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है लेकिन यमुना बैराज और ओखला बैराज में एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। निचले इलाकों में रह रहे लगभग 1,500 लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। सरकार की तरफ से ये राहत शिविर उस्मानपुर, गढ़ीमांडू, बदरपुर खादर, आईएसबीटी सेतु, शकरपुर, अक्षरधाम मंदिर, पुराना यमुना सेतु, गीता कालोनी और ओखला में स्थापित किए गए हैं।

इस बीच बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक राज्य की सभी नदियों के जलस्तर में लगातार कमी आ रही है। नियंत्रण कक्ष में तैनात सहायक अभियंता रविन्द्र कुमार ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि वाल्मिकीनगर स्थित बैराज पर गंडक का जल प्रवाह सुबह 10 बजे 1,77,800 क्यूसेक था जबकि गुरुवार सुबह आठ बजे यह 2,24,000 क्यूसेक था।

वीरपुर बैराज पर कोसी नदी का जल प्रवाह इसी समय 1,97,115 क्यूसेक रहा जबकि गुरुवार को आठ बजे सुबह यहां का जल प्रवाह 2,15,290 क्यूसेक था।

बागमती, कमलाबलान, कोसी तथा महानंदा नदी अभी भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बागमती रूनीसैदपुर तथा बेनीबाद में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। कमला बलान झंझारपुर में और महानंदा डेंगराघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बलुआ तथा बलसारा में कोसी खतरे के निशान से ऊपर है।

प्रमुख नदियों के जलस्तर में भले ही कमी आ रही हो परंतु अब भी बाढ़ से राज्य के सैकड़ों गांव घिरे हुए हैं। गांवों में पानी घुस जाने के कारण लोग ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। सरकार राहत और बचाव कार्य की पुख्ता व्यवस्था की बात कह रही है परंतु ग्रामीण इसमें लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।

मुजफ्फरपुर जिले के औराई, कटरा, गाायघाट तथा बोचहां प्रखण्डों के करीब 100 गांवों में बाढ़ का पानी तबाही मचाए हुए है।

गोपालगंज जिले में करीब एक हजार से अधिक घर गंडक नदी की बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। सदर प्रखण्ड के अलावा मांझा, बरौली, सिधवलिया और बैकुंठपुर प्रखण्ड के करीब 48 ग्राम पंचायतों के लोग बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं।

पश्चिम चंपारण की बाल्मिकी व्याघ्र परियोजना में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे वन्यजीवों को भी परेशानी हो रही है। जिले के लौरिया, नरकटियागंज, बगहा प्रखण्डों के कई गांवों से जिला मुख्यालय का संपर्क टूट गया है।

बाल्मिकी व्याघ्र परियाजना के वन क्षेत्र पदाधिकारी एम़ ज़े अली ने बताया कि वन्यजीवों को क्षेत्र से बाहर निकलने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। सुपौल और सहरसा के तटबंधों पर बाढ़ के पानी का दबाव बना हुआ है। सुपौल के नौहट्टा, सिमरी बख्तियारपुर, सरखुआ तथा महिषी प्रखण्ड के आधा से ज्यादा गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।

उत्तराखण्ड में पिछले 11 दिनों से लगातार जारी बारिश से राज्य का जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। राज्य में जानमाल सहित फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। मुख्य मार्गो के साथ-साथ गांवों की सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासनिक स्तर पर सभी प्रयासों के बावजूद सूबे का बुनियादी ढांचा काफी अधिक क्षतिग्रस्त हो गया है।

मध्य प्रदेश मे हुई औसत से कम बारिश के चलते राज्य की प्रमुख नदी नर्मदा का प्रवाह रफ्तार नहीं पकड़ पाया है और उसका जलस्तर अब भी औसत से नीचे है। अभी नर्मदा से प्रदेश को कोई खतरा नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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