कश्मीर में जन-जीवन सामान्य
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "श्रीनगर और घाटी के अन्य कस्बों से शुक्रवार को कर्फ्यू हटाया गया है।"
हुर्रियत के अलगाववादी धड़े के नेता सैयद अली गिलानी ने लोगों को एक दिन में जरूरी काम निपटाने को कहा है।
बंद और कर्फ्यू के कारण तीन दिन बाद घाटी में शिक्षण संस्थान, दुकानें, बैंक, डाक घर और व्यापारिक संस्थान खुले हैं। निजी और सार्वजनिक वाहन भी सड़कों पर उतरे हैं।
घाटी में 11 जून से शुरू हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों में अब तक 64 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 78 दिनों में घाटी के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय केवल 10 दिन खुले हैं।
एक स्थानीय व्यापारी मुश्ताक अहमद ने कहा, "शिक्षा व्यवस्था पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। पिछले दो महीने से स्कूल कॉलेज लगभग बंद हैं।"
उन्होंने कहा, "नवंबर में मेरे बेटे की 10वीं की परीक्षा है, मैं नहीं जानता वो क्या करेगा। अभी उसका पाठ्यक्रम आधा ही हुआ है। घाटी के सभी विद्यार्थियों की यही हालत है।"
गिलानी के कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने गुरुवार शाम को अपील की कि विरोध प्रदर्शन को धीमा किया जाए ताकि कश्मीरी युवाओं की शिक्षा प्रभावित न हो।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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