कृत्रिम कार्निया से आंखों की रोशनी लौटी
इस नई तकनीक के जरिए मानव शरीर के ऊतकों को प्रयोगशाला में कार्निया की तरह विकसित किया जाता है।
स्थानीय समाचार पत्र 'द टेलीग्राफ' में प्रकाशित समाचार के मुताबिक चिकित्सकों ने मरीज की आंख के अगले हिस्से में क्षतिग्रस्त कार्निया को पूरी तरह हटाकर उसके स्थान पर कृत्रिम कार्निया का प्रत्यारोपण किया।
इसके बाद चिकित्सकों ने आंख की मौजूदा कोशिकाओं और तंत्रिकाओं को कृत्रिम कार्निया से जुड़ाव स्थापित करने के लिए अनुकूल स्थितियां पैदा कीं।
कार्निया आंख का वह हिस्सा या लैंस होता है जो देखने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।
दुनियाभर में आंखों की बीमारियों के दौरान कार्निया के क्षतिग्रस्त होने से बड़ी संख्या में लोग अंधे हो जाते हैं। दुनियाभर में फिलहाल ऐसे लोगों की संख्या एक करोड़ है।
चिकित्सकों ने प्रत्यारोपण के पहले परीक्षण में ही सफलता प्राप्त कर ली थी और बाद में इस प्रत्यारोपण से कई मरीज देख पाने में सक्षम हुए।
इस शोध का नेतृत्व कर रहे स्वीडन के लिंकोपिंग विश्वविद्यालय के मे ग्रीफित्स ने कहा, "हम इन परिणामों से बेहद उत्साहित हैं। इस परीक्षण से साबित हुआ है कि कृत्रिम कार्निया आंख के अन्य अंगों से जुड़ सकती है।
उन्होंने कहा, "इस पर कुछ और शोधों के बाद इससे लाखों दृष्टिहीन लोगों को देखने में सक्षम बनाया जा सकता है जो कि अभी कार्निया दान किए जाने का इंतजार करते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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