खौफ के साये में मौसम विभाग के कर्मचारी

देहरादून, 22 अगस्त (आईएएनएस)। देवभूमि के नाम से मशहूर उत्तराखण्ड में बेमौसम बरसात और भूस्खलन जैसी अन्य प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। ऐसे में आम आदमी ही नहीं, मुख्यमंत्री और राज्यपाल से लेकर मंत्री और नेता तक घरों से निकलने से पहले मौसम विभाग से एक बार मौसम की जानकारी लेना नहीं भूलते।

ऐसे में यह विडंबना ही है कि मौसम की भविष्यवाणी कर दूसरों को दुर्घटना के प्रति आगाह करने वाले राज्य के मौसम विज्ञान केंद्र के कर्मी ही खुद खौफ के साये में जी रहे हैं।

बरसात के इस मौसम में आए दिन हो रही ऐसी घटनाओं से मौसम विभाग के कर्मचारियों को अपना ही भवन धंसने का खतरा सता रहा है। स्थानीय मौसम केंद्र के निदेशक पिछले चार वर्षो से केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के समक्ष इस बाबत अपना रोना रो रहे हैं, पर समस्या जस की तस बनी हुई है। अलबत्ता वे खौफ के साये में काम करने को मजबूर हैं।

राज्य मौसम केंद्र के निदेशक आनंद कुमार शर्मा ने आईएएनएस को बताया कि कार्यालय की जर्जर अवस्था के बारे में पिछले चार साल से केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को बताए जाने के बाद भी समस्या समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि कार्यालय के छतों से भारी मात्रा में बारिश का पानी टपक रहा है। आशंका इस बात की है कि इसके कारण कभी कोई बड़ा हादसा न हो जाए।

शर्मा ने बताया कि लंबी शिकायतों के बाद केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा मौसम विभाग के कार्यालय की छत लाखों रुपये खर्च पर हाल ही में तैयार की गई है। बावजूद इसके छत से पानी का टपकना बदस्तूर जारी है। उन्होंने कहा कि वह इस बाबत दिल्ली स्थित केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता से शिकायत करेंगे।

यही नहीं, कार्यालय के एक कर्मचारी ने बताया कि सूबे को मौसम की जानकारी देने वाला तंत्र का कार्यालय मरम्मत के नाम पर चार माह तक खुले में चलता रहा और कर्मचारी धूल-धक्कड़ में बैठकर काम करते रहे।

गौरतलब हो कि राज्य मौसम केंद्र का कार्यालय भारत सरकार के संस्थान भारतीय सर्वेक्षण विभाग के प्रांगण में है, जिसकी देखरेख केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने हाल ही में मौसम की सटीक जानकारी देने के लिए मौसम केंद्र की पीठ थपथपाई थी तथा शर्मा को इस बाबत पत्र लिखकर बधाई दी थी।

इस पत्र में कहा गया था कि मौसम केंद्र द्वारा मौसम के संबंध में दी गई सटीक जानकारी के कारण मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों को निर्धारित करने में काफी सहूलियत मिली है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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