ऑस्ट्रेलिया चुनाव में लेबर और लिबरल पार्टी के बीच कांटे की टक्कर
लेबर पार्टी का नेतृत्व मौजूदा प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड कर रही हैं। लिबरल पार्टी ऑफ आस्ट्रेलिया की कमान टोनी एबट के हाथ में हैं। आस्ट्रेलियाई संसद-हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स- में 150 सीटें हैं। चुनाव विश्लेषकों के अनुसार इस बार त्रिशंकु संसद की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
वेबसाईट 'टेलीग्राफ डॉट को डॉट यूके'में प्रकाशित इस सर्वेक्षण के अनुसार इन चुनावों में ग्रीन पार्टी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। माना जा रहा है कि इस पार्टी के प्रत्याशियों को मिलने वाले ज्यादातर मतों का लाभ लेबर पार्टी को मिल सकता है।
पिछले पांच सप्ताह से चल रहे चुनाव अभियान के दौरान लेबर पार्टी के नेताओं ने हल्की बढ़त हासिल की थी लेकिन एबट के समर्थन में हाल के दिनों में हुए वृद्धि से मुकाबला कांटे का हो गया है।
जानकार हालांकि अभी भी गिलार्ड को आगे मान रहे हैं वहीं आस्ट्रेलियाई मीडिया इस संबंध में बंटा हुआ है। 'न्यूज लिमिटेड' टेबलॉयड समाचार पत्र ने एबट को आगे बताया है वहीं देश का दूसरा सबसे बड़ा समाचार पत्र समूह फेयरफैक्स गिलार्ड के समर्थन में नजर आ रहा है।
पत्र का कहना है कि चुनाव में कामयाबी एबट के लिए उल्लेखनीय रहेगी, जिन्हें चुनाव प्रचार की शुरूआत में लेबर पार्टी ज्यादा अहमियत नहीं दे रही थी, लेकिन एबट ने बहुत अनुशासन और क्षमता के साथ सरकार के खिलाफ प्रचार किया और शरणार्थियों की समस्या जैसे मसले उठाते हुए मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
चुनाव में प्रमुख नेता-
जूलिया गिलार्ड:
मौजूदा प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी की उम्मीदवार जूलिया गिलार्ड आस्ट्रेलिया की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और देश की ऐसी दूसरी प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म ऑस्ट्रेलिया से बाहर हुआ है। वेल्स(ब्रिटेन) में 1961 में जन्मी गिलार्ड चार साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ एडिलेड(ऑस्ट्रेलिया) आ गई थीं।
गिलार्ड के राजनीतिक करियर का महत्वपूर्ण दौर 1998 में उनके सांसद चुने जाने से शुरू हुआ। वह मेलबर्न के लेलर क्षेत्र से चुनी गई। वर्ष 2007 में गिलार्ड लेबर पार्टी के दिग्गज नेताओं में शुमार हो गईं। इस साल उन्हें केविन रड के नेतृत्व वाली सरकार में उप-प्रधानमंत्री बनाया गया। वह 24 जून 2010 को केविन रड के स्थान पर ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। किसी जमाने में बेहद लोकप्रिय नेता रहे रड की लोकप्रियता में कमी आने से इसी साल जून में उन्हें पद से हटना पड़ा था।
टोनी एबट:
चार नवंबर 1957 में जन्मे एबट की पार्टी का नाम लिबरल पार्टी है लेकिन यह पार्टी देश की प्रमुख दक्षिणपंथी पार्टी मानी जाती है। राजनीति में कदम रखने से पूर्व एबट पत्रकार थे। वह खिलाड़ी के रूप में मुक्केबाजी में हाथ आजमा चुके हैं। वह पहले पहल मार्च 1994 में सांसद निर्वाचित हुए थे। वह 2003 से 2007 तक और उसके सितम्बर 2008 से नवम्बर 2009 तक मंत्री रहे। उनके लिए चुनावी जीत एक बड़ी कामयाबी होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**












Click it and Unblock the Notifications