रूस अब भी सबसे बड़ा सैन्य सहयोगी
गुलशन लूथरा/अशोक गोयल
नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। पांच दशक से अधिक पुरानी दोस्ती का तकाजा है कि रूस आज भी भारत का प्रमुख सैन्य सहयोगी बना हुआ है। भारत से उसे शीघ्र ही 59 बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टरों के लिए आर्डर मिलने वाला है। इससे पहले उसे ऐसे 80 हेलीकॉप्टरों के आर्डर मिल चुके हैं।
भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल पी.वी. नाइक ने 'इंडिया स्ट्रेटेजिक' रक्षा पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि भारत को रूस से 80 एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों की पहली खेप इस साल मिल जाएगी। इन हेलीकॉप्टरों के लिए 2008 में आर्डर दिए गए थे।
नाइक ने कहा कि दो वर्ष पहले भारतीय वायुसेना ने रूस को 80 हेलीकॉप्टरों का आर्डर दिया था और अब 59 अन्य 80 एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों का आर्डर दिया गया है।
इसके अलावा वायुसेना ने 42 सुखोई एसयू-30 एमकेआई युद्धक विमान खरीदने के लिए रक्षा मंत्रालय के सामने एक प्रस्ताव रखा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इस संख्या को मिला दिया जाए तो भारत अब तक रूस से 272 सुखोई एसयू-30 एमकेआई युद्धक विमान खरीद चुका है।
वायुसेना ने रूस की एकमात्र युद्धक सामान निर्यातक एजेंसी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ एक करार किया है, जिसके तहत सोवियत काल में भारतीय सेना में शामिल किए गए मिग-29 और आई-76 एयरलिफ्टरों को अत्याधुनिक बनाया जाएगा।
साथ ही साथ इसी कंपनी के माध्यम से नौसेना ने 45 मिग-29 के शिपबोर्ड जेट विमानों का भी आर्डर दिया है।
भारतीय सेना ने सोवियत संघ से 1968 के बाद से मिग-21 विमान खरीदे थे। उस समय एक विमान की कीमत दो करोड़ रुपये लगाई गई थी लेकिन आज के सुखोई एसयू-30 एमकेआई युद्धक विमान काफी महंगे हो गए हैं।
आज एक विमान की कीमत 1.36 अरब डॉलर है। इसमें विमान की 230 करोड़ रुपये की असल कीमत और तकनीक का हस्तांतरण (टीओटी) के लिए जोड़ी गई रकम शामिल है।
भारतीय सेना ने संख्या के आधार पर रूस के साथ सुखोई एसयू-30 एमकेआई युद्धक विमानों के लिए अब तक का सबसे बड़ा करार किया है। इस करार के बदले भारत सरकार को रूस को 10 अरब डॉलर चुकाने होंगे।
वायुसेना ने इसके अलावा रूस से 126 से अधिक मध्यम बहुद्देशीय लड़ाकू विमान (एमएमआरसीए) खरीदने की इच्छा जाहिर की है लेकिन इस करार को अब तक अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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