अग्निवेश का माओवादियों को 72 घंटे के सीजफायर का प्रस्ताव

अग्निवेश ने माओवादियों के इस प्रस्ताव पर कहा, "माओवादी नेता किशनजी का यह एक बेबाक फैसला है।" अग्निवेश इससे पहले भी केंद्र सरकार की ओर नक्सलियों से वार्ता करने में मध्यस्थ के तौर पर काम कर चुके हैं।
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उन्होंने ही नक्सली नेता और प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद को सरकार से शांतिवार्ता के लिए तैयार किया था। मगर इस वार्ता के शुरु होने से पहले ही आंध्र प्रदेश में आजाद को एक पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
पुलिस और सरकार पर आजाद की हत्या का आरोप लगाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अग्निवेश का कहना है कि तीन महीने के संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर नक्सली सरकार से सीधा और शांतिपूर्ण जवाब चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद माओवादियों को संघर्ष विराम शुरू करने की तिथि जल्द तय करनी चाहिए। साथ ही सरकार को भी माओवादियों के प्रस्ताव को मानते हुए उस तिथि से 72 घंटे का युद्धविराम घोषित करना चाहिए।
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माओवादी नेता किशनजी के एक आडियो टेप के जरिए शांति वार्ता और तीन महीने के संघर्ष विराम की बात मीडिया के सामने आई है।
माओवादियों के शांति वार्ता प्रस्ताव के बाद अग्निवेश की यह टिप्पणी सामने आई है। माओवादियों ने शांति वार्ता में मध्यस्थ के तौर पर स्वामी अग्निवेश या रेल मंत्री ममता बनर्जी का नाम प्रस्तावित किया है।












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