सांसदों की वेतन वृद्धि के मुद्दे पर प्रमुख राजनीतिक दलों की समीक्षा
नई दिल्ली। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को लोकसभा में सांसदों के वेतन वृद्धि पर विधेयक लाने का प्रस्ताव रख कर सदन में भूचाल ला दिया है। उन्होने लोकसभा में कहा, "सरकार सांसदों की वेतन वृद्धि के लिए विधेयक यथा संभव जल्द से जल्द पेश करने के लिए तैयार है। सांसद वेतन-भत्ता अधिनियम, 1954 में संशोधन के लिए एक विधेयक पेश करना है। हम इसी सत्र में इस विधेयक को लाने की कोशिश कर रहे हैं।"
जहां एक ओर भारत की जनता रोज बढ़ती महंगाई से त्राहि माम कर रही है। वहां सांसदों द्वारा खुद अपना वेतन बढाये जाने के लिए विधेयक लाना और विधेयक लाने के लिए जल्दबाजी करना संसद के गिरते स्तर का अभूतपूर्व उदाहरण है। जहां पूरे विश्व में सरकारें महंगाई और अर्थव्यवस्था को सुस्ती से उबारने के लिए अपने खर्चों में कटौती कर रही हैं वहां भारत मक्कारी और भ्रष्टाचार की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जिसका दूसरा उदाहरण मिलना मुश्किल है।
विरोध में कौन से दल
सदन में इस प्रस्ताव का मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने विरोध किया। वामपंथी पार्टी के सांसदों ने इस तरह का कोई कदम उठाए जाने का विरोध किया है, जिसमें खुद से सदस्यों का वेतन-भत्ता तय किया जाए। वाम दलों का कहना है कि इस मुद्दे पर एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाना चाहिए।
माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2006 में सांसदों की वेतन वृद्धि का फैसला लेने के लिए अलग तंत्र स्थापित करने का वादा किया था। लेकिन इस पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। येचुरी ने कहा, "माकपा इस बात का विरोध करती है कि सांसद स्वयं अपना वेतन बढ़ाने का फैसला लें। माकपा सांसदों के वेतन पर फैसला लेने वाली संसदीय समिति से हट गई है। हम इससे संबंधित फैसले में शामिल नहीं हैं।"
वेतन वृद्धि का समर्थन
लेकिन संसद के अन्य राजनीतिक दलों राजद, सपा, बसपा, शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस ने सांसदों की वेतन वृद्धि का फैसला टाले जाने को लेकर लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में हंगामा शुरू कर दिया है। इन दलों के प्रमुख नेता एवं अध्यक्ष सभी लालू यादव का साथ दे रहे हैं। इस मांग के समर्थन में कांग्रेस के कुछ सांसद भी खड़े हुए। भाजपा के सदस्य हालांकि इस दौरान मंगलवार को सदन में शांत रहे। लेकिन प्रदर्शनरत सांसदों ने उनसे भी साथ आने का आह्वान किया।
सांसदों का वर्तमान वेतन
उल्लेखनीय है कि सांसदों को फिलहाल 16,000 रुपये का वेतन मिलता है। संसदीय मामलों के मंत्रालय का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये महीना किया जाए। जबकि संसदीय समिति ने इसे 80,001 रुपये करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि सांसदों का वेतन कैबिनेट सचिव से एक रुपये ज्यादा होना चाहिए।
हालांकि सांसदों को इस मासिक वेतन के अलावा बड़ी रकम भत्तों के रूप मिलती है। सत्र में शामिल होने या संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने के लिए सांसदों को 1,000 रुपये प्रतिदिन का भत्ता मिलता है। इसके अतिरिक्त सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के लिए 20,000 रुपये महीने और कार्यालयी खर्च के लिए 20,000 रुपये महीने का भत्ता मिलता है।
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