स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भाषण
नई दिल्ली। देश के 64वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्र ध्वज फहराने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश को संबोधित किया। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने नक्सलवा, आतंकवाद, महंगाई, जैसे गंभीर विषयों पर चिंता जताई और देश को एकजुट होकर सभी समस्याओं का सामना करने का आह्वान किया।
प्रस्तुत हैं प्रधानमंत्री के भाषण के मुख्य बिंदु-
महंगाई
पिछले कुछ महीनों से उच्च महंगाई ने कई परेशानियां खड़ी की है। आज मैं महंगाई बढ़ने के विस्तृत कारणों के बारे में चर्चा करना नहीं चाहता। लेकिन मैं यह निश्चित रूप से कहना चाहता हूं कि हम इस समस्या के समाधान के लिए हर संभव उपाय कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम इस कोशिश में कामयाब होंगे।
-यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी अर्थव्यवस्था का प्रबंधन बुद्धिमानी से करें ताकि उच्च कर्ज के कारण भविष्य में हमारे विकास पर प्रतिकूल असर पड़े। पेट्रोलिय उत्पादों पर सब्सिडी का बोझ हर साल बढ़ रहा है। पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में वृद्धि करना जरूरी था। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो हमारा बजट सब्सिडी के बोझ को नहीं उठा पाता और शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों को रोजगार मुहैया कराने की हमारी योजना प्रभावित होंगी।
नक्सलवाद
नक्सलवाद हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। हम नक्सल प्रभावित इलाकों में कानून का राज स्थापित करने के लिए राज्य सरकारों को पूरा सहयोग करेंगे। मैं नक्सलियों से एक बार फिर अपील करता हूं कि वे हिंसा छोड़कर बातचीत के लिए आगे आएं और सामाजिक और आर्थिक विकास में तेजी लाने के लिए हाथ मिलाएं।
नक्सलवाद से निपटने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को मिलकर काम करना होगा। किसी भी राज्य के लिए यह बहुत मुश्किल भरा होगा कि वह बिना केंद्र के सहयोग और राज्यों के समन्वयन के इस समस्या से निपटे।
आतंकवाद
जहां तक पाकिस्तान की बात है तो हम आशा करते है कि वह भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा। हम पाकिस्तान की सरकार के साथ चर्चा में इस पर जोर देते आ रहे हैं। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो हम पाकिस्तान के साथ वार्ता में आगे नहीं बढ़ सकते।
नया भारत
हम एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं जिसमें हर नागरिक की भागीदारी होगी। एक ऐसा भारत जहां समृद्धि हो और हर नागरिक सम्मान और गरिमा की जिंदगी जीता हो। एक ऐसा भारत जहां हर समस्या का समाधान लोकतांत्रिक तरीके से निकाला जाए। एक ऐसा भारत जहां हर नागरिक के मौलिक अधिकार की रक्षा की जा सके।
-पिछले कुछ वर्षो में हमने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हर नागरिक को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून के तहत वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार को सुनिश्चित किया गया है। सूचना का अधिकार कानून नागरिकों को जागरूक बनाने में सहायता कर रहा है।
शिक्षा
-इस वर्ष हमारी सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून बनाया है जिससे प्रत्येक नागरिकों को देश के आर्थिक विकास में भागीदार बनने और साथ ही सहयोग करने का मौका मिलेगा। महिलाओं को समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हमने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए कदम उठाया है।
इसके अलावा स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 50 फीसदी कर दी गई हैं। तमाम मजबूतियों के बावजूद हमारे सामने कुछ गंभीर चुनौतियां हैं। हमारा समाज हमेशा धर्म, प्रांत, जाति और भाषा के आधार पर बंट जाता है। हमें इसे खत्म करना होगा, हम किसी भी परिस्थिति में अपने समाज को बंटता हुए नहीं देख सकते।
कृषि
पिछले कुछ वर्षो में कृषि विकास दर में महत्वूपर्ण वृद्धि हुई है। लेकिन हम अब भी लक्ष्य को हासिल करने से दूर हैं। हमें कृषि विकास की दर बढ़ाकर चार फीसदी करने की जरूरत है। हमारी सरकार खाद्य सुरक्षा चाहती है ताकि कोई भी नागरिक भूखा न रहे। इसके लिए कृषि उत्पादन बढ़ाना होगा और यह केवल तभी संभव है जब उत्पादकता बढ़े। हमें प्रौद्योगिकी की जरूरत है जो सूखे जमीन पर कृषि की जरूरत को पूरा करे। इसके अलावा हमारी कृषि को नई चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, गिरते भू-जल स्तर और मिट्टी की गिरती गुणवत्ता से निपटना होगा।
-यह घोषणा करते हुए मुझे खुशी हो रही है कि भारत में बोरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशिया की स्थापना हो रही है। यह संस्थान बेहतर और नए बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के अलावा भारत और दक्षिण एशिया के अन्य देशों के किसानों के लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराएगा। हमने किसानों को हमेशा बेहतर कीमत देने की कोशिश की है ताकि उत्पादन को बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके। लेकिन किसानों को बेहतर कीमत देने के कारण खुले बाजार में खाद्यानों की कीमतों में भी वृद्धि होती है।
विकास
हम चाहते है कि विकास का फल आम आदमी तक पहंचे। हम अब भी गरीबों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए कृत संकल्प हैं। आज हमें अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोई नई योजना की जरूरत नहीं है। बल्कि जिन योजनाओं को हमने शुरू किया है उसे क्रियान्वित करने की जरूरत है। हम इस राज्य सरकारों, पंचायती राज संस्थाओं और नागरिक समाज के सहयोग से हासिल करना चाहते हैं।
हमारी सरकार धार्मिक शांति और सहिष्णुता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम अल्पसंख्यकों की रक्षा और उनकी विशेष जरूरतों को पूरा करने की अपनी जिम्मेदारी पर भी विचार कर रहे हैं। हम शीघ्र ही संसद में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दो अलग-अलग परिषदों की स्थापना के लिए विधेयक लाएंगे। ताकि इन क्षेत्रों में सुधार में तेजी लाइ जा सके।
कश्मीर/राष्ट्रमंडल खेल
कुछ दिन पहले लद्याख में बादल फंटने से कई लोगों की जान चली गई। संकट की इस घड़ी में पूरा देश लद्दाख के लोगों के साथ है। मैं आश्वस्त करता हूं कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की हर संभव सहायता करेगी। जम्मू एवं कश्मीर में हिंसा छोड़ने वाले हर व्यक्ति और समूह के साथ हम बातचीत करने के लिए तैयार हैं। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं।
-हमारा लोकतंत्र में देश के किसी भी क्षेत्र या समूह की समस्याओं के समाधान के लिए उदारता और लचीलापन हैं। मैं हाल ही में जम्मू एवं कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ बैठक की है। हम इस प्रक्रिया को आगे ले जाएंगे। मैं अपने देशवासियों विशेषतौर पर पूर्वोत्तर और कश्मीर के लोगों से कहना चाहता हूं कि उन्हें हमारे साथ हाथ मिलाने के लिए लोकतांत्रित तरीके अपनाना चाहिए।
करीब डेढ़ माह बाद दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल शुरू होंगे। मेरा मानना है कि देशवासी इसे राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाएंगे और इसे सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
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