मर्यादा की सीमा में हो आलोचना : प्रधानमंत्री
देश के 64वें स्वाधीनता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं एक बात कहना चाहता हूं जो हमारी संस्कृति और गौरवशाली परम्परा से जुड़ी है। पिछले कुछ दिनों में हमारी राजनीति में कठोर बातों और कड़वे शब्दों का इस्तेमाल बढ़ गया है।"
उन्होंने कहा, "यह हमारी उदारता, विनम्रता और सहनशीलता की परम्परा के विरूद्ध है। लोकतंत्र में, खासकर एक प्रगतिशील समाज में आलोचना का अपना स्थान है, पर आलोचना मर्यादा की सीमा में होनी चाहिए।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारे देश में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस में परस्पर विरोधी विचारधाराओं के लिए गुंजाइश है और होनी भी चाहिए। मैं सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध करना चाहूंगा कि वे इस विषय पर विचार करें।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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