वीजा शुल्क बढ़ाने का अमेरिका में विरोध

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता फिलिप जे क्राउले ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, "इस मुद्दे पर विभिन्न नेताओं से चर्चा हुई है।" उन्होंने कहा, "हम सरकार के सभी पक्षों से विचार विमर्श कर रहे हैं और उद्यमियों की चिंताओं पर ध्यान दे रहे हैं। हम इस मुद्दे पर बातचीत जारी रखेंगे।"
अमेरिका में आधे से कम अमेरिकी कर्मचारियों वाली कंपनियों पर एच-1 बी और एल-1 वीजा के शुल्क में भारी वृद्धि की गई है। अमेरिका को इस शुल्क वृद्धि से 60 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि प्राप्त होगी। अमेरिकी उद्योग जगत ने इस निर्णय का तीखा विरोध किया है।
अमेरिका-भारत व्यापार परिषद के अध्यक्ष रॉन सोमर्स ने कहा, "सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए बढ़ाए गए इस शुल्क का ज्यादातर बोझ भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा जो कि अमेरिका में बड़ा निवेश कर रही हैं।"
उन्होंने कहा कि इस भेदभावपूर्ण कानून से भारत अमेरिका के निवेश संबंधों पर बुरा असर पड़ेगा। इससे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कर्मचारी प्रभावित होंगे। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आउटसोर्सिग के खिलाफ अपना अभियान जारी रखते हुए इस कानून पर हस्ताक्षर किए हैं।
ओबामा ने व्हाइट हाउस में एक बैठक में कहा था "हमारी अर्थव्यवस्था को विदेशों से चीजें खरीदने की आदत पड़ गई है।" उन्होंने कहा कि देश में निर्माण कामगारों की संख्या में 33 प्रतिशत की कमी आई है। यह काफी महत्वपूर्ण है कि इस स्थिति को परिवर्तित किया जाए।
ओबामा ने कहा कि गुरुवार को पारित किए गए इस कानून से अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धी और निर्यात आधारित उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।












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