हरियाली तीज की धूम
इस दिन कुछ स्त्रियां परिवार में सुख-शांति के लिए व्रत भी रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद भोजन ग्रहण करती हैं, हालांकि व्रत रखना जरूरी नहीं होता। इसी तरह यह वाली तीज सिर्फ विवाहित स्त्रियाँ ही नहीं, बल्कि कुमारी कन्याएँ भी मना सकती हैं।
नवविवाहित और सुहागिन स्त्रियां अपने मायके में इस त्योहार को मनाती हैं। उनको मायके वालों की तरफ से वस्त्र, मिष्ठान और द्रव्य आदि से नवाजा जाता है। जिन युवतियों की शादी तय हो जाती है, उन्हें उनके ससुरालियों की ओर से उपहार आदि भेंट किए जाते हैं।
हरियाली तीज के एक दिन पहले महिलाएं सिंधारा त्योहार मनाती हैं। इसका नवविवाहिता स्त्रियों के लिए विशेष महत्व है। शादी के बाद पहले सिंधारा पर उन्हें अच्छे परिधान और गहने आदि भेंट किए जाते हैं। हरियाली तीज मुख्यत: धरती पर छाई लहलहाती फसल की खुशी और अच्छी पैदावार की कामना से मनाई जाती है।
इस मौके पर स्त्रियां हरे रंग के परिधान पहनती हैं। इस तीज पर मेहंदी का खास महत्व है। वे अपने हाथों पर मेहंदी रचाती हैं और हरी चूड़ियां डालती हैं।
पति के लिए रखा जाता है तीज का व्रत
विवाहित और अविवाहित सभी युवतियां सहेलियों के साथ झूलों पर झूलती हुई सावन से संबंधित गीत गाती हैं। ये गीत सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सभी तरह के प्रसंगों से सराबोर होते हैं।













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