संसद और कार्यपालिका ने गैस पीड़ितों को निराश किया : चिदंबरम (लीड-1)
राज्यसभा में भोपाल गैस त्रासदी पर बहस के दौरान चिदंबरम ने कहा, "चुने हुए राजनैतिक प्रतिष्ठानों ने त्रासदी के पीड़ितों को निराश किया। न्यायपालिका के हस्तक्षेप के चलते मामला और जटिल हो गया।"
भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की रात को यूनियन कार्बाइड कंपनी के संयंत्र में जहरीली गैस के रिसाव से कम से कम 3,500 लोगों की तत्काल मौत हो गई थी।
चिदंबरम ने कहा, "यह 16 वीं लोकसभा है और आज त्रासदी के 26 साल बाद मैं आपसे संवेदना, दुख और दर्द बांट रहा हूं। मुझे इस बात का अपराधबोध हो रहा है कि पिछले 26 सालों में कार्यपालिका और संसद ने इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया जो उसे करना चाहिए था।"
गृहमंत्री ने कहा, "चुने हुए प्रतिनिधियों ने सोचा कि वह न्यायापालिका का सहारा लेकर छुप सकते हैं।"
चिदंबरम ने कहा, "यह एक और उदाहरण है जिसमें संसद और कार्यपालिका ने न्यायपालिका के हित में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह नहीं किया।"
उन्होंने कहा, "इस त्रासदी के बाद जिस तरह से कार्यपालिका की भूमिका में होनी चाहिए थी, वैसी नहीं रही। 1980 के आखिर और 90 की शुरुआत में इस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा देने या फिर उन्हें न्याय दिलाने के संदर्भ में कार्यपालिका कई कदम उठा सकती थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"
उन्होंने कहा, "कार्यपालिका के पीछे हटने की स्थिति में अदालत की ओर से कई आदेश दिए गए। कार्यपालिका ने उन्हीं आदेशों के तहत कदम उठाए। कभी भी आगे आकर इस संबंध में कोई पहल नहीं की गई।"
'यूनियन कार्बाइड' के तत्कालीन प्रमुख वॉरेन एंडरसन के संदर्भ में चिदंबरम ने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालती फैसले के बाद एंडरसन के खिलाफ मामला और भी कमजोर पड़ गया। उन्होंने कहा कि एंडरसन के प्रत्यर्पण के संदर्भ में जो कुछ भी प्रयास किए गए, उनमें सफलता नहीं मिली।
मौजूदा समय में सरकार की पहल का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा, "हमने इस त्रासदी को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं जो सरकार ने स्वीकार भी कर लिए हैं। इन सुझावों का क्रियान्वयन किया जा रहा है।"
गौरतलब है कि वर्ष 1984 में भोपाल की 'यूनियन कार्बाइड' की फैक्टरी से जहरीली गैस के रिसाव से हजारों लोग मारे गए थे। उस दौरान इस कंपनी का प्रमुख वॉरेन एंडरसन देश से बाहर अमेरिका जाने में सफल रहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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