श्वास परीक्षण से लगाया जा सकता है कैंसर का पता
वैज्ञानिकों के दल का विश्वास है कि इस दिशा में आगे कार्य कर एक छोटी सी इलेक्ट्रॉनिक नाक विकसित की जा सकेगी जो चिकित्सकों को बीमारी का जल्द पता लगाने में मददगार साबित होगी।
वेबसाइट 'एक्सप्रेस डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक हेफा स्थित इजरायली प्रौद्योगिकी संस्थान टैक्नियॉन के प्रोफेसर अब्राह्म कुटेन कहते हैं, "यह अध्ययन बताता है कि एक इलेक्ट्रॉनिक नाक स्वस्थ और कैंसर पीड़ित श्वास में फर्क कर सकती है और इससे विभिन्न प्रकार के कैंसर से पीड़ित मरीजों की सांसों में अंतर को पहचाना जा सकता है।"
कुटेन कहते हैं, "यदि हम इन शुरुआती परिणामों की बड़े पैमाने पर पुष्टि कर लेते हैं तो यह नई तकनीक कैंसर की जल्द पहचान के एक सामान्य यंत्र के तौर पर इस्तेमाल की जा सकेगी। इससे कैंसर के इलाज पर नजर रखी जा सकेगी और उसके असर का आकलन भी किया जा सकेगा।"
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने 20 से 75 वर्ष के आयु वर्ग के 177 स्वस्थ व कैंसर पीड़ित प्रतिभागियों पर अध्ययन किया गया।
शोध में प्रतिभागियों ने एक माउथपीस में श्वास ली। इस माउथपीस में उनकी श्वास का एक नमूना लिया गया। इसके बाद श्वास स्पंदन को संवेदकों से गुजारा गया। ये संवेदक श्वास में सूक्ष्म मात्रा में मौजूद रसायनों का पता लगा सकते हैं। बाद में कम्प्यूटर पर इन आकड़ों का विश्लेषण होता है।
'ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर' में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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