अमेरिकी सीनेटर की एच1-बी शुल्क बढ़ाने की मांग
वाशिंगटन, 9 अगस्त (आईएएनएस)। इंफोसिस जैसी भारतीय आईटी कंपनियों को चुराई गई कारों के हिस्से अलग करने वाली 'कबाड़ी की दुकान' की संज्ञा देते हुए एक अमेरिकी सीनेटर ने एच1-बी वीजा शुल्क को बढ़ाए जाने का समर्थन किया है।
इससे अमेरिका-मेक्सिको की सीमा को सुरक्षित करने के लिए 60 करोड़ डॉलर उगाहे जाएंगे।
डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर चार्ल्स ई.शूमर ने पिछले सप्ताह सीनेट में एक बहस के दौरान कहा कि सीमा सुरक्षा विधेयक का सबसे बेहतर हिस्सा सीमा पैकेज को पूरी तरह भुगतान आधारित बनाना और एक पैसा का भी घाटा नहीं बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि आपात सीमा कोष के लिए कबाड़ी की दुकान मानी जाने वाली उन विदेशी कंपनियों से पैसा लिया जाना चाहिए जो अधिक वेतन वाले अमेरिका के उच्च प्रौद्योगिकी रोजगारों के लिए कम वेतन पर अन्य देशों से अस्थाई कर्मचारियों को लाती हैं।
सीमा सुरक्षा विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए प्रयासरत न्यूयार्क के सीनेटर ने कहा कि यह इंफोसिस जैसी कंपनियों के लिए है। इससे नियमों के अनुसार चलने वाली अमेरिकी लोगों को नियुक्त करने वाली इंटेल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां प्रभावित नहीं होंगी।
उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा विधेयक से दो महत्वपूर्ण लक्ष्यों की पूर्ति होगी। इससे सीमाएं अधिक सुरक्षित होंगी और अमेरिकी कंपनियों और अमेरिकी कामगारों को विदेशी कंपनियों से मुकाबले में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि एच1-बी वीजा कार्यक्रम से काफी अधिक अमेरिकी कंपनियों को फायदा हुआ है लेकिन कई कंपनियों ने इसका दुरुपयोग किया है।
उन्होंने कहा कि कंपनियां जिन विदेशी पेशेवरों को अमेरिका लाती हैं वे यहां कुछ वर्ष रहकर विशेषज्ञता सीख कर वापस लौट जाते हैं। इसलिए उन पर शुल्क बढ़ाया जाना चाहिए।
सीनेट से विधेयक के पारित होने के बाद डेमोक्रेट सीनेटर क्लेयर मैकस्किल ने भी भारतीय आईटी कंपनियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका में काम करने वाली विप्रो, टाटा, इंफोसिस और सत्यम जैसी कंपनियां विदेशी पेशेवरों को लाने के लिए एच1-बी और एल वीजा पर निर्भर हैं।
प्रस्तावित विधेयक से जिन कंपनियों में अमेरिकी नागरिकों की संख्या 50 प्रतिशत से कम है, उनके द्वारा एच1-बी और एल1 वीजा के प्रति आवेदन पर 2,000 डॉलर का शुल्क लगाया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications