राष्ट्रमंडल खेल : भ्रष्टाचार पर लोकसभा में हंगामा, जेपीसी जांच की मांग (राउंडअप)
नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन की तैयारियों को लेकर उठ रहे सवालों तथा इसमें कथित तौर पर हुई अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों ने लोकसभा में सोमवार को जम कर हंगामा हुआ। सरकार की एक सहयोगी पार्टी ने प्रधानमंत्री से बयान की मांग की तो दो विपक्षी दलों ने इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराए जाने की मांग की।
इसके विपरीत विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करने हुए सरकार ने दावा किया कि अक्टूबर महीने में देश में होने वाला राष्ट्रमंडल खेल अब तक का सबसे सफल और सर्वश्रेष्ठ आयोजन साबित होगा।
लोकसभा में इस मुद्दे को अल्पकालिक बहस के रूप में उठाया गया। विपक्ष ने भोजनावकाश के बाद इस मुद्दे पर जम कर होहल्ला मचाया। दूसरी ओर शहरी विकास मंत्री एस.जयपाल रेड्डी और कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर सरकार का बचाव किया।
लोकसभा में 'राष्ट्रमंडल खेल-2010 की तैयारी में विलंब से उत्पन्न स्थिति' पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए रेड्डी ने कहा, "राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के लिए जो खेल गांव बनाया गया है, उसे जाकर जब आप देखेंगे तो गर्व करेंगे। राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में ऐसा खेल गांव कभी नहीं बना होगा। हमें इस पर गर्व करने की जरूरत है।"
उन्होंने कहा, "हमें पूरी उम्मीद है कि राष्ट्रमंडल खेल आयोजन अब तक का सर्वश्रेष्ठ आयोजन साबित होगा।"
निर्माण कार्य में गड़बड़ियों व कथित अनियमितताओं पर उन्होंने कहा, "हमें इस आयोजन के व्यापक पक्ष को देखना चाहिए। इसे नजरअंदाज करके छोटे-मोटे पक्षों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। मीडिया में जो बातें आ रही हैं, उन्हें आने दीजिए। वे अपना काम कर रहे हैं। जहां तक केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट की बात है, तो इसमें प्रारंभिक बातें सामने आई हैं। लेकिन प्रत्येक प्रारंभिक बात को घोटालों की संज्ञा देना उचित नहीं है।"
इससे पहले, तैयारियों में हो रही देरी को 'खेलों के साथ खिलवाड़' तथा इसमें कथित अनियमितताओं को 'राष्ट्रमंडल का भ्रष्टमंडल' करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस पूरे मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराए जाने की मांग की।
भाजपा के कीर्ति आजाद ने कहा, "केंद्र सरकार और दिल्ली की सरकार राष्ट्रमंडल खेलों के साथ खिलवाड़ कर रही है। भ्रष्टाचार का पिटारा ऐसा खुल रहा है कि इसे भ्रष्टमंडल खेल कहा जाने लगा है।"
उन्होंने कहा, "जिन्होंने अनियमितता की है, उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। इस मामले की पहले जेपीसी और फिर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच होनी चाहिए।" राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भाजपा की इस मांग का समर्थन किया।
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "मैं यह कहना चाहता हूं कि राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े सभी बुनियादी फैसले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने किए। उसी ने खेलों की मेजबानी की बोली लगाने का फैसला किया और उसी ने इन खेलों के लिए दिल्ली को चुना।"
खेल की तैयारियों के बारे में उन्होंने कहा, "राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन कुल 20 स्टेडियम में होना है। इनमें से 18 स्टेडियम तैयार कर लिए गए हैं और इन्हें प्रबंधन समिति के हवाले कर दिया गया है। एक स्टेडियम 15 अगस्त और दूसरा 16 अगस्त को प्रबंध समिति को सौंप दिया जाएगा।"
जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, "खेलों को लेकर घोटाले संबंधी हो रहे रोजना नए-नए खुलासे 'हरि अनंत हरि कथा अनंता' बन गए हैं और सरकार लीपापोती में जुटी हुई है। न जाने सरकार के कितने विभाग और कितने मंत्रालय इसमें जुटे हैं। चारों तरफ लूट-खसोट और तमाशा मचा हुआ है।"
खेलों की तैयारियों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, "राष्ट्रमंडल खेल नजदीक हैं। बारात सामने खड़ी है और हम तैयारियों में ही जुटे हैं। हमारे आगे खाई, तो पीछे कुआं हैं। हम करें तो क्या करें। बात बिगड़ती जा रही है। जिधर देखो, उधर अपमान ही अपमान दिखाई दे रहा है।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार ने दिल्ली से गरीबों को बाहर कर दिया है, क्योंकि उसे डर था कि विदेश से आने वाले मेहमान यहां की गरीबी न देख लें।
खेलों में कथित अनियमितता के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि देश के सामने सच्चाई लाई जानी चाहिए। यह साफ होना चाहिए कि इन अनियमितताओं में कौन-कौन शामिल है?
दूसरी ओर रेल मंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि यदि मनमोहन सिंह लोकसभा में यह बयान देते हैं कि राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, तो उसे संतोष मिलेगा। तृणमूल कांग्रेस, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में शामिल दूसरी बड़ी पार्टी है।
खेलों के आयोजन में अनियमितता के संबंध में मीडिया में आई खबरों का जिक्र करते हुए तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा, "इस मुद्दे पर सदन में स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। हम सभी चिंतित हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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